फोटो-2- कथा सुनाते भगवताचार्य नवलेश दीक्षित। संवाद
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चित्रकूट। श्रद्धेय व्यक्ति पर भरोसा करने से भय की निवृत्ति हो जाती है। कंस भय, पूतना संशय है। जीवन में दोनों का मरना जरूरी है। यह तभी होगा जब महापुरुषों की वाणी पर भरोसा करेंगे।
खोही स्थित जग निवास में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन भागवताचार्य नवलेश दीक्षित ने कहा कि भगवान जिसकी आराधना करते हैं, वह राधा है। श्रीमद्भागवत की राधा एक विशेष विभूति है। उन्होंने रामचरित मानस में भरत जी रास पंचाध्यायी की कथा सुनाते हुए उनकी महिमा बताई।
कहा कि मनुष्य का हृदय रोग भागवत का दशम स्कंद दूर करता है। शरीर की नाड़ियों की चर्चा करते हुए सूर्य नाड़ी, चंद्र नाड़ी, मध्य नाड़ी का उल्लेख किया। बताया कि भोजन पचाने में सूर्य नाड़ी मदद करती है। भोजन के बाद बायें लेटे। इससे सूर्य नाड़ी चलने लगती है। यदि शरीर से स्वस्थ हैं तो सूर्य नाड़ी चलेगी। नियत मृत्यु, अकाल मृत्यु, इच्छा मृत्यु, तीर्थ मृत्यु, अल्प मृत्यु होती है।
मृत्यु से पहले सभी कामना खत्म हो जाए तो उसे श्रेष्ठ मृत्यु कहते हैं। भागवत सुनने का यही अभिप्राय है मृत्यु महोत्सव बन जाए। श्री रुक्मणी विवाह का दिव्य महोत्सव जग निवास में मनाया गया। कथा परीक्षित डा. कृष्ण कुमार त्रिपाठी, मनोज कुमार, धर्मेंद्र त्रिपाठी, अजीत त्रिपाठी, उमाशंकर पटेल आदि ने आरती कर प्रसाद वितरित किया।