टूटा पड़ा पेड़ और बिजली का तार
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तीन दिन पहले आई आंधी व बारिश से ग्रामीण क्षेत्रों में टूटे 50 से अधिक पोलों को अभी तक नहीं बनाया जा सका है। मुख्यालय के फीडर नंबर एक में 16 घंटे तक आपूर्ति बंद रही। लोढ़वारा फीडर तीन दिन से बंद है। जिससे 40 गांव अंधेरे में हैं। मानिकपुर क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांव ऐसे हैं जहां 48 घंटे से आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है।
जिले की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमराई है। आंधी व बारिश से टूटे बिजली के तार व पोल के कारण हालत यह है कि 25 मई से लेकर शनिवार तक बनकट पावर हाउस से संचालित लोढ़वारा फीडर नहीं बन पाया है। जबकि बांदा व चित्रकूट के दो दर्जन कर्मचारी दिन रात काम में जुटे रहे। इस फीडर से लगभग 40 गांव की आपूर्ति होती है। तीन दिन से इन गांवों में अंधेरा है।
कुछ ऐसा ही हाल राजापुर व पहाड़ी क्षेत्र के गांवों का है। मानिकपुर व गढ़चपा फीडर भी तीन दिनों से पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं। गौरतलब है कि इन फीडरों से चार दर्जन गांव को आपूर्ति होती है। ऐसे हालात में इन सभी गांवों में बिजली की आपूर्ति न होने से लोग परेशान हैं।
इसके अलावा मुख्यालय के फीडर नंबर एक की आपूर्ति शुक्रवार की शाम से बंद हुई थी। डीएम मोनिका रानी और सीडीओ ए दिनेश कुमार के प्रयास से 16 घंटे बाद ही चालू हो सकी है। इसके बावजूद अभी भी पूरी तरह से आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई है।
जेई सुनील पटेल के अचानक अवकाश पर जाने से आपूर्ति व्यवस्था और गड़बड़ा गई है। अधिशाषी अभियंता राजमणि विश्वकर्मा ने बताया कि कम स्टाफ होने और कुछ के अवकाश लेने से परेशानी है। जेई को अचानक अवकाश नहीं लेना चाहिए था। इसी बात को लेकर अधिशाषी अभियंता और एसडीओ से भी कहासुनी हुई।
विद्युत आपूर्ति बहाल न होने से पेयजल समस्या भी है। मुख्यालय के आधा दर्जन मोहल्लों में पानी की आपूर्ति न होने से लोग सड़क किनारे लगे हैंडपंप पर लाइन लगा रहे हैं।
शनिवार को शहर के सिविल लाइंस मार्ग पर विद्युत लाइन दुरुस्त करते समय करंट लगने से लाइनमैन राजकुमार झुलस गया। करंट लगते ही वह लगभग 15 फुट ऊंचाई से नीचे जा गिरा। कर्मचारियों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जहां डाक्टरों ने उसे सतना रेफर किया है।