फोटो नंबर-10- साधु-संतों की बैठक में बोलते महंत रामहृदय दास। संवाद
साधु-संतों ने बैठक कर गौरिहार मंदिर तोड़े जाने का किया विरोध
संवाद न्यूज एजेंसी
खोही(चित्रकूट)। चित्रकूट के कामदगिरी मंदिर पहुंच प्रमुख मार्ग के पास स्थित पौराणिक गौरिहार मंदिर में साधू संतों की बैठक हुई। इसमें सड़क चौड़ीकरण के नाम पर गौरिहार मंदिर के भवन को तोड़ने का विरोध किया गया। एक राय में साधु-संतोंने कहा कि इस तरह तो कई अखाड़े व मठ मंदिर के भवन क्षतिग्रस्त होंगे। यह स्वीकार नहीं है। इससे चित्रकूट का पौराणिक स्वरूप बदल जाएगा।
बुधवार को गौरिहार मंदिर परिसर में चित्रकूट के कई अखाड़े के संत महंतों ने आकर बैठक की। महंत रामहृदयदास ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण को लेकर सैकड़ों साल पुराने गौरिहार के राजा द्वारा बनवाए गए गौरिहार मंदिर को तोड़े जाने की खबर पर संत इकट्ठा हुए हैं। इसको तोड़ने से धार्मिक स्वरुप बदलेगा। दिगंबर अखाड़ा के महंत दिव्यजीवन दास ने कहा क मध्य प्रदेश क्षेत्र में गौरिहार मंदिर, बिजावर मंदिर एवं अन्य कई मंदिर रजवाड़ों के जमाने से बनाए गए हैं और ऐसे मंदिरों का स्वरूप नहीं बदलना चाहिए। जानकीमहल के महंत सीताशरण महाराज ने स्थानीय प्रशासन पर संत समाज को प्रताड़ित करने व उपेक्षा का आरोप लगाया है।
बैठक में तय हुआ कि एतिहासिक स्थल व मंदिरों के अगल-बगल से जमीन लेकर के रोड बना दी जाए। कुछ जगह पर ज्यादा चौड़ी सड़क नहीं भी होगी तब भी चलेगा