सड़क किनारे एकत्र पानी से प्यास बुझाते मवेशी
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मऊ तहसील का बरगढ़ क्षेत्र भी पाठा से कम नहीं है। सूखे की विभीषिका का यहां भी नजारा दिखाई पड़ता है। इन दिनों दर्जनों गांव में पेयजल समस्या बढ़ती जा रही है।
बरगढ़ कस्बे की दलित बस्ती में वर्षों पुराना कुआं सूखा है। लगभग 50 घरों के लोग पानी के लिए दूसरी बस्ती जाते हैं। कुएं की सफाई कराने की मांग की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। सुबरहा के रामलाल व चुनकी ने बताया कि गांव के सभी हैंडपंप खराब हैं। अकेले कुएं के पानी से जीवन कट रहा है। विनोबा नगर में भी पेयजल संकट है। स्थानीय उमेश कुमार व अशोक ने बताया कि यहां टैंकर से आपूर्ति होनी चाहिए।
इसके अलावा मडहा के प्रधाना उमाकांत ओझा ने बताया कि लगभग दो हजार की बस्ती के लिए स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। खराब हैंडपंपों को रिबोर करवाने के लिए अधिकारियों को पत्र लिखा है। स्थानीय पप्पू पाल, मंगलेश कुमार, अर्जुन, इंद्रेश पाल व रामदयाल आदि ने बताया कि लगभग एक किमी दूर दूसरी बस्ती से पानी लाने को मजबूर हैं।
पेयजल का संकट गर्मी बढ़ने के साथ बढ़ता जा रहा है। इंसान के साथ मवेशी भी पानी के लिए भटक रहे हैं। तालाब सूखने से मवेशियों को पानी के लिए भटकना पड़ता है। जहां भी पानी दिखता है वहीं मवेशी पहुंच जाते हैं। अब पानी गंदा हो या साफ किसी तरह मवेशी गला तर करते है। हाईवे पर कोलगहिया गांव के पास सड़क किनारे घरों से निकलने वाला गंदा पानी एकत्र होता है। जिसे देखकर दो मवेशी दूर से भटकते हुए गला तर करने पहुंच गए।