प्रदर्शन के दौरान जानकारी देते बाढ़ पीड़ित
- फोटो : संवाद
चित्रकूट/राजापुर-मऊ। मंदाकिनी यमुना समेत अन्य नदियों में आई बाढ़ से हुए नुकसान व बारिश से गिरे घरों का मुआवजा नहीं मिलने पर ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। सोमवार को ग्रामीणों ने तहसील परिसर में प्रदर्शन कर विरोध जताया है। कहा कि बस्ती में पानी भर जाने से कई कच्चे घर गिर गए। इसके बाद भी उनको मुआवजा नहीं मिल रहा है। पन्नी के सहारे रहने को मजबूर हैं। आरोप यह भी लगाया कि सर्वे मनमाने ढंग से हो रहा है।
जिले में मंदाकिनी नदी सहित यमुना नदी सहित कई छोटी नदी व गांवों के नाले बढ़ जाने कई गांवों की बस्तियों में जलभराव हो गया है। इससे कच्चे घर भी गिर गए है। बारिश आपदा में 18 की मौत हो चुकी है। नदियों व नालों का पानी कम होने के बाद भी गांवों बस्तियों में जलभराव होने से कच्चे घर गिर गए है। मुआवजा नही मिलने पर ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं। सोमवार को भरतकूप क्षेत्र के भैसोंधा गांव के निवासियों ने तहसील परिसर में प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि बस्ती में जलभराव होने से कई कच्चे घर गिर गए है। पन्नी लगाकर रहने को मजबूर हैं। गांव में सर्वेक्षण कर पीड़ितों को मुवाजा दिलाया जाए। इस मौके पर पीड़ित नीलम देवी, सुरतिया, रीना, आशा देवी, चुन्री, शिवचरन, रामचरन, रजुवा, चुनवाद, अशोक, राजेश आदि मौजूद रहे।
इनसेट
आर्थिक सहायता के साथ दी जा रही किट
एडीएम उमेश चंद्र ने बताया कि जिला प्रशासन के प्रथम सर्वे में अभी तक कुल लगभग 500 घर गिरे है। पीड़ितों को अभी लेखपालों के माध्यम से किट उपलब्ध कराई जा रही है। वही नदी नालों व तालाब में डूबने सहित घरों में गिरने से अभी तक कुल 18 की मौत हो चुकी है। जिनमें 13 लोगों के परिजनों को जिनको जिला प्रशासन की तरफ से आर्थिक सहायता चार -चार लाख के चेक के रुप में दी जा चुकी है।