चित्रकूट। राजापुर के सिकरी अमान गांव निवासी अवधेश यादव का परिवार खेती कर ही जीवनयापन करता था। शादी के बाद तीन साल तक इनके कोई बच्चे नहीं थे। पत्नी कुसुमकली के कहने पर ही वह कमाई के लिए गुजरात गया था।
फांसी की सजा मिलने के बाद पत्नी के साथ जेल जाते समय बताया कि पत्नी के कहने पर ही लालमुनि को मारा फिर फंसने के डर से दोनों ने मिलकर उसके बच्चों को भी गला घोटकर मार दिया। बताया कि वह लोग सोच रहे थे कि यह बाहर के हैं इनके शव भी यहां मिलेंगे तब भी कोई नहीं जान पाएगा कि इन्हें किसने मारकर फेंका होगा।
अवधेश ने बताया कि गुजरात में वहां उसके संबध बुढार की लालमुनि से हो गए। इस दंपती के पास अच्छी खासी संपत्ति थी। पहले बताया कि वह शादीशुदा नहीं है। इसी झांसे में लालमुनि आ गई और खासी रकम व जेवर लेकर बच्चों के साथ उसके साथ राजापुर चली आई थी। उसे राजापुर में किराये के कमरे में रखा। इसके बाद पत्नी को सब पता चला तो योजना बनाकर सबको घर बुलाया और बारी-बारी कर मार दिया। उसके जेवर व अन्य संपत्ति रखकर शव बोरे में भरकर दूर खेतों में फिंकवा दिए। हत्या के बारे में बताया कि एक रस्सी से पहले लालमुनि का सोते समय गला घोटा। पत्नी ने भी साथ दिया। इसके बाद सभी बच्चोंको भी इसी तरह मारकर बोरे में दो शव भरे। फिर एक पान मसाला के एक बड़े झोले में दो बच्चों के शव भरकर बाइक से रात में दूर जाकर खेतों में फेंक कर गांव आया था। 24 अप्रैल को जब दो शव पुलिस ने बरामद किए तो डरकर वह पत्नी के साथ गांव छोडकर भाग गया।
इनसेट
इस जघन्य हत्याकांड करने के बाद भी दंपती के चेहरे में कोई शिकन तक नहीं थी। गुरुवार को जब अदालत ने जब अवधेश को फांसी व मंटू उर्फ कुसुमकली को आजीवन कारावास की सजा सुनाई तो उनके चेहरे में कोई प्रतिक्रिया नजर नहीं आई। बाहर निकलने पर कुसुमकली ने साड़ी से चेहरा छिपा लिया। अवधेश ने मीडिया को देखकर चेहरे पर हाथ लगा लिया। पुलिस कर्मियों से जल्द ही वहां से ले जाने कीबात कहता रहा।