चित्रकूट। फाइलेरिया रोगी ने अपना दर्द बयां किया। बताया कि पिता की सलाह न मानना भारी पड़ गया। उनकी बात मानकर समय रहते इलाज शुरू कर देते तो आज मोटा सा पैर लेकर न चलना पड़ता।
गोपालकुंज तरौंहा निवासी रमेश चंद चौरसिया बताते हैं कि शुरुआत में उनके पैर में सूजन आ गई थी। यह देखकर पिता ने चेताया कि ये फाइलेरिया के लक्षण दिख रहे हैं। इसका सही तरीके से जांच कराकर इलाज कराओ। रमेश बताते हैं कि उस समय पिता की बातों को यह कहकर टाल दिया कि हल्की सूजन है। कुछ समय बाद ठीक हो जाएगी। यह वर्ष 2012 की बात थी। तीन साल बाद जब पैर की सूजन ठीक नहीं हुई तो उन्हें पिता की बातें याद आई।
रमेश ने बताया कि अब पैर की सूजन को गंभीरता से लिया और जांच कराने का मन बनाया है। उस समय यहां अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं थी। वह प्रयागराज जाकर प्राइपेट ऑर्थोसर्जन को दिखाया। डॉक्टर ने देखते ही बताया कि यह फाइलेरिया है। आयुर्वेद और एलोपैथ दोनों दवाएं कर रहे हैं। नियमिति इलाज से अब पैर की हालत स्थिर है। रमेश बताते हैं कि जब से इलाज करा रहे हैं तब से अपने बच्चों को फाइलेरिया की दवा हर साल खिलाते हैं। साथ ही जब समय मिलता है तो और लोगों को भी प्रेरित करते हैं कि हाथ या पैर में सूजन आए तो हल्के में न लें। जांच कराकर सही तरीके से इलाज कराएं।
सीएमओ डॉ. भूपेश द्विवेदी ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा साल में एक बार खिलाई जाने वाली दवा खुद खाएं और पूरे परिवार को खिलाएं। इससे फाइलेरिया के खतरे से बचे रहेंगे। जिला मलेरिया अधिकारी प्रमोद कुमार शुक्ला ने बताया कि फाइलेरिया से हाथ और पैर में सूजन आती है। पुरुषों के अंडकोष में सूजन आ जाती है। सहायक जिला मलेरिया अधिकारी रोहित व्यास ने बताया कि अब तक पांच लाख से अधिक लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाई जा चुकी है।