चित्रकूट। जिले में लक्ष्य के अनुरूप मात्र 33 प्रतिशत ही धान की खरीद हो सकी है। जबकि इस वर्ष जिले में धान की पैदावार अच्छी रही। ज्यादातर किसानों ने अपना अनाज गल्ला मंडियों में ही आढ़तियों को बेच दिया। सरकारी खरीद केंद्रों में कई कानूनी अड़चनों के चलते लक्ष्य आधा भी पूरा नहीं हुआ। किसानों का लगभग 35 लाख रुपये का भुगतान भी बाकी है।
जिले में धान की खरीद की शुरूआत दिसंबर माह माह से शुरु हुई थी। 29 फरवरी धान खरीद की अंतिम तिथि थी। 20 हजार मीट्रिक ट्रन धान खरीदने का लक्ष्य था। जिसमें मात्र 6 हजार 65 मिट्रिक टन की ही खरीद हो सकी है। 1176 किसानों ने धान बेचा है, जबकि धान खरीदने के लिए जिला एवं खाद्य विपणन विभाग की तरफ शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र में धान केंद्र खोले गए थे। इसके बाद भी सफलता नहीं मिली, जबकि इस बार धान की अच्छी पैदावार भी हुई हैं। हालांकि इस बार खरीद के समय मौसम भी खराब था। इसका भी खरीद पर असर देखा गया है। जिले में इस वर्ष 19,059 एमटी धान का उत्पादन हुआ है। जिसे काफी अच्छा मना जाता है। इसमें साबरमती 70 प्रतिशत हुआ है।
धान केंद्रों में उन्नत प्रजाति का धान नहीं लिया गया
चित्रकूट। प्रगतिशील किसान शिव कुमार शुक्ला, रेवती रमण त्रिपाठी ने बताया कि धान केंद्र में उन्नत प्रजाति का धान नहीं लिया जाता। मात्र डंकल धान ही लिया गया, जबकि गल्लामंडी में उन्नत प्रजाति की धान ली जाती है। इस बार ज्यादातर किसानों ने उन्नत किस्म की धान बासमती, सोनम सहित अन्य किस्म लगाया था। अच्छी पैदावार भी हुई। जिसको गल्लामंडी में आढ़तियों के यहां बेचा दिया है।
समय से धान का नहीं हो पाया उठान
चित्रकूट। समय से धान की उठान भी धान केंद्रों में बनाई गई गोदामों से नहीं हो पाया। जिसका मुख्य कारण चित्रकूट जिले में एक भी धान मील न होना बताया गया। धान की मील बांदा जनपद में ही लगी है। धान का उठान न होने से बीच- बीच में धान की खरीद प्रभावित रही। 1176 किसानों को13. 83 करोड़ रुपये का भगुतान हुआ है। 35 लाख रुपये बकाया है।
वर्जन
जिले में इस वर्ष धान खरीदने का लक्ष्य 20 हजार मिट्रिक टन था। जिसमे 6 हजार 65 मिट्रिक टन खरीदा गया। 33 प्रतिशत ही धान की खरीद हो सकी है। -अविनाश झा, जिला एवं खाद्य विपणन अधिकारी