चमड़ा मंडी (नहर चौराहा) के लोग दस दिन से जल संकट से जूझ रहे हैं। आसपास सरकारी हैंडपंप न होने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है। हाल ये है कि लोग नलों की ओर टकटकी लगाए रहते हैं कि कब पानी आएगा। उन्हें पानी भरने के लिए काफी दूर जाना पड़ता है। भीषण गर्मी में पानी की किल्लत से लोगों में आक्रोश व्याप्त है। उनका कहना है कि वे नियमित रूप से बिल जमा कर रहे हैं पर पानी नहीं मिल रहा। मोहल्ले में करीब सौ कनेक्शन हैं। कुछ उपभोक्ता वर्षों से यही हाल होने तो कुछ पानी न मिलने पर भूख हड़ताल तक की बात कह रहे हैं। वहीं जल संस्थान के एक्सईएन ने मामले की जानकारी से इंकार कर सारा दोष बिजली व्यवस्था पर मढ़ दिया।
अभिलाष कुमार पटेल ने बताया कि दस दिन से पानी नहीं आ रहा। विभाग में शिकायत की पर कोई सुनवाई नहीं हुई। दूसरों के घरों के निजी हैंडपंपों से पानी ला रहे हैं। मोहल्ले में एक भी सरकारी हैंडपंप नहीं है।
जितेंद्र पटेल ने कहा कि पानी न आने की शिकायत विभाग से करते हैं तो टाल दिया जाता है। मोटर से पानी खींचने पर दोहरी मार झेलनी पड़ती है। बिजली का बिल बढ़ता है और पानी भी पूरा नहीं मिलता।
दिनेश कुमार मिश्र ने कहा कि समय से बिल भरने के बाद भी पानी नहीं मिलता। भीषण गर्मी में पेयजल संकट के चलते परेशानी हो रही है। दूसरों के यहां जाकर पानी भरने की मजबूरी है।
फूला रानी ने कहा कि बिना पंप के पानी चढ़ता ही नहीं। अब तो मोटर लगाने पर भी पानी नहीं मिल रहा। दस दिन से कपड़े भी नहीं धुल पा रहे हैं।
कुसुम ने रोष प्रकट कर कहा कि अधिकारियों की जिम्मेदारी की कौन कहे। इनसे ज्यादा शिकायत करो तो कहते हैं कि जाओ कनेक्शन कटा लो। पानी तो ऐसे ही मिलेगा। इस समय पानी की भीषण समस्या है।
अवधेश कुमार पटेल का कहना था कि पानी नहीं मिला तो चुप नहीं बैठेंगे। बिल समय पर देते हैं पर पानी नहीं मिलता। अब भूख हड़ताल करेंगे।
एक्सईएन बोले, मामला संज्ञान में नहीं
इस संबंध में जल संस्थान के एक्सईएन राकेश चंद्र ने कहा कि उनके संज्ञान में मामला नहीं है। उन्होंने दस दिन से पानी न आने के संबंध में सारा दोष बिजली व्यवस्था पर मढ़ दिया। कहा कि बिजली कटौती होती है तो पंप चल नहीं पाते। ऐसे में सप्लाई कहां से होगी। आपने मोहल्ले की समस्या बताई है, दिक्कत दूर की जाएगी।