शिक्षक बुद्धिजीवी होने के साथ ही श्रमजीवी भी होता है। शिक्षक ऐसी प्रभावी शिक्षा दें, जिससे दुनिया में शांति का संदेश प्रसारित हो। ये बातें कामदगिरि प्रमुख द्वार के पीठाधीश्वर स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने विकलांग विवि में चल रहे उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रादेशिक शिक्षण शिविर और शैक्षिक विचार गोष्ठी के समापन पर बतौर मुख्य अतिथि कहीं।
उन्होंने शिक्षकों के सम्मान की जरूरत बताई। कहा कि माता-पिता बच्चे को जन्म देते हैं लेकिन शिक्षक उनका जीवन संवारता है। सभी शिक्षक गुणवत्तापरक शिक्षा देकर अच्छे नागरिकों का निर्माण करें, तभी देश का उत्थान होगा। प्रदेश अध्यक्ष चेतनारायण सिंह ने कहा कि शिक्षा के गुणात्मक सुधार के लिए प्रस्तावित कार्यों को पूरा किया जाएगा। संगठन का लक्ष्य है पूरे देश में माध्यमिक शिक्षा का एक समान पाठ्यक्रम लागू कराना। सरकार ऐसी शिक्षा लागू करे जो ज्ञानवर्धक होने के साथ ही रोजगारपरक हो।
महामंत्री लवकुश कुमार मिश्र ने इस बात पर नाराजगी जताई कि चार अप्रैल को मुख्यमंत्री से पांच बिंदुओं पर सहमति बनी थी लेकिन उसे भी पूरा नहीं किया गया। अगर जुलाई तक शासनादेश जारी नहीं किया जाता तो आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। कार्यक्रम में रामबाबू शास्त्री, राजबहादुर सिंह चंदेल, डा. महेंद्र राय, लल्लू राम शुक्ल, घनश्याम दत्त मिश्र, ओमदत्त सिंह, प्रेमचंद्र सिंह, मनोज पांडे, बाबूलाल अहिरवार, रामजी राही, इंद्रजीत सिंह, शंकर यादव समेत कई जिलों के शिक्षक मौजूद रहे।
उधर, पत्रकार वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष चेतनारायण सिंह ने कहा कि उनका संगठन शिक्षकों के हित के लिए संकल्पबद्ध है। तीन स्तरीय मांगों पर सुनवाई न हुई तो आंदोलन किया जाएगा।