पहाड़ी (चित्रकूट)। थाना क्षेत्र के एक गांव में दलित किशोरी की खुदकुशी के मामले में नया मोड़ सामने आ गया है। परिजनों ने गांव के ही तीन किशोरों पर होली के दिन सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया है। साथ ही पुलिस पर दबाव बनाकर समझौता करने की बात कही है। पुलिस ने अब प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों की तलाश की शुरू कर दी है। घटना के बाद सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। एसपी ने पूरे मामले की जांच सीओ राजापुर को सौंपी है। सदर विधायक ने भी परिजनों ने मिल कर पूरी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
गांव निवासी किशोरी ने मंगलवार की देर शाम को सूने घर में बल्ली में दुपट्टा से फंदा लगा लिया था। परिजन सीएचसी लेकर पहुंचे, वहां डाॅक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया था। सूचना पर पुलिस अस्पताल पहुंची तो परिजनों ने गांव के ही तीन युवकों पर होली पर्व के दिन सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगा कार्रवाई की मांग करने लगे। पुलिस ने रात में ही किशोरी के पिता की तहरीर पर गांव के तीन किशोरों पर अहपरण, सामूहिक दुष्कर्म, मारपीट, जान से मारने की धमकी, एससी एसटी सहित कुल 11 बीएनएस में प्राथमिकी दर्ज की है। घटना की सूचना पर सदर विधायक अनिल प्रधान, सपा जिलाध्यक्ष शिव शंकर सिंह यादव, सदस्य जिला पंचायत मीरा भारती सहित अन्य कई जनप्रतिनिधि पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और मृतका के परिजनों से मिल कर संवेदना व्यक्त की और पीड़ित परिवार को मुआवजा, सुरक्षा व दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है।
किशोरी के खुदकुशी के मामले में एक महिला सहित तीन डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम हुआ है। पूरे पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई गई है। स्लाइड व नमूने भी लिए गए हैं।
सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष की प्रतिक्रिया
बुधवार को खबर वायरल होने के बाद सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स हैंडल पर लिखा कि भाजपा शासित उप्र के चित्रकूट में गैंगरेप की पीड़ित एक दलित लड़की ने इस लिए फंदा लगा कर जान दे दी कि उसको न्याय नहीं मिला। भाजपा राज में यही महिला सुरक्षा की सच्चाई है। वहीं बसपा जिलाध्यक्ष शिवबाबू वर्मा ने लिखा कि बेटियों की सुरक्षा की गांरटी देने वाली सरकार के नेता आखिर इस घटना में मौत क्यों हैं, प्रकरण अति गंभीर, पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान उठाता है। संतोष कुमार ने तो आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाने की मांग की हैं।
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ये है मामला
किशोरी के पिता ने बताया कि चार मार्च होली पर्व के दिन उसकी बेटी घर से कुछ दूर कुएं में पानी भरने गई थी। इसी दौरान गांव के तीनों युवकों ने बेटी को उठा ले गए और खेत में ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म किया था। बेटी घर आई और घटना की जानकारी दी तो पुलिस से शिकायत की थी। आरोप लगाया कि पुलिस ने आरोपियों से मिल कर प्राथमिकी दर्ज न करने का दबाव बनाया था। इसके बाद लोक लज्जा व दबाव के कारण समझौता कर लिया था। फिर आरोपी व उनके परिजन अक्सर गाली गलौज कर जान से मारने की धमकी देते थे। पिता ने आरोपियों पर उम्रकैद की मांग की है। मां ने आरोप लगाया कि पुलिस ने घटना के समय दबाव बना कर समझौता करा दिया था, पुलिस ने कहा कि आरोपी जेल चले जाएंगे तो तुमको क्या मिलेगा। कुछ दिन बाद फिर छूट कर आ जाएंगे। घटना के बाद से उसकी बेटी गुमसुम व तनाव में रहती थी। इसी कारण खुदकुशी की है।
छह मार्च को पुलिस को सूचना मिली थी कि चार मार्च को एक किशोरी पानी भरने गई थी, रास्ते में तीन किशोरों ने हाथ पकड़ कर रंग लगा दिया था। इसके बाद परिजनों ने बिना किसी दबाव के आपस में समझौता कर लिया था। इसमें किशोरी व उसकी मां के वीडियो बयान भी पुलिस के पास हैं, साथ ही हल्का प्रभारी ने जीडी में पूरे मामले को दर्ज किया है। उस समय के लिखित तहरीर में गैंगरेप का कोई जिक्र नहीं किया था। अब किशोरी के फंदा लगाने के बाद परिजनों ने सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया है। तहरीर पर तीनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। मौके पर जांच की जा रही है। मौके से किशोरी की एक डायरी मिली है, उसकी जांच चल रही है। पूरे मामले में अगर पुलिस की थोड़ी भी संलिप्तता मिलती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
एसपी अरुण कुमार सिंह