खोही (चित्रकूट)। तीर्थनगरी के संत महात्माओं ने महाशिवरात्रि पर मंदाकिनी नदी में स्नान के लिए नई परंपरा की शुरूआत की। गाजे-बाजे के साथ रथ और बग्घी पर सवार होकर भव्य शोभायात्रा निकली।
अस्त्र-शस्त्र व अखाड़ों के निशान लहराते संतों की शोभायात्रा देखने के लिए काफी संख्या में लोग उमड़ पड़े। ग्रामोदय विश्वविद्यालय से चली यात्रा चार घंटे में रामघाट पहुंची। इसके बाद मंदाकिनी में शाही स्नान करके पूजा अर्चना की।
महाशिवरात्रि पर मंदाकिनी नदी में संतों ने पहली बार शाही स्नान किया। नहाने के बाद भगवान मत्तगजेंद्रनाथ मंदिर में पूजा अर्चना की। इसे नई परंपरा का श्रीगणेश माना जा रहा है। शाही स्नान के बाद नगर परिषद पार्क में संतों ने एक सभा भी की, जिसमें मंदाकिनी में शाही स्नान परंपरा के विकास और चित्रकूटधाम के आध्यात्मिक, धार्मिक विकास पर विचार-विमर्श किया गया। विरक्त संत मंडल एवं मां मंदाकिनी सेवा ट्रस्ट के संयोजन में विभिन्न अखाड़े, मठ-मंदिरों के लगभग 600 संत, महंत, नागा साधु-महात्मा शाही यात्रा, स्नान एवं संत सभा में सम्मिलित रहे।
महंत सनकादिक ब्रह्मचारी महाराज, सीताशरण दास महाराज, रामहृदय दास महाराज, गोविंददास महाराज, बलराम दास महाराज, रामप्यारे दास महाराज, प्रेमनारायण दास, पागल बाबा, दिनेश दास, रामबली दास, माधवदास महाराज, रामप्रिय दास, रामकुमार दास, राघव दास, बालकदास महाराज, रामदास, नागा नरसिंह दास, मोहनदास, मनोज दास, अजयदास आदि मौजूद रहे।