चित्रकूट। नाबालिग को शादी का झांसा देकर दुष्कर्म व विरोध के मामले में दोषी को सत्र न्यायाधीश ने पांच वर्ष की सजा सुनाई। उस पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माने की आधी रकम पीड़िता को देने के आदेश दिए हैं। जुर्माना न जमा करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
शासकीय अधिवक्ता फौजदारी श्याम सुंदर मिश्र ने बताया कि सदर कोतवाली क्षेत्र के एक व्यक्ति ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि उसकी बेटी (16) पड़ोस में ही मां के साथ एक कार्यक्रम में गई थी। वहां से गांव का ही विवेक यादव उर्फ बउवा बहलाकर अपने साथ ले गया। बउवा का सहयोग उसकी दादी बिंदी ने किया था। बउवा के घर गए तो उसके पिता लंबरिया ने कोई सहयोग नहीं किया।
इस पर तीनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। करीब दो साल बाद किशोरी मिली थी। कोर्ट में किशोरी ने बताया कि विवेक शादी का झांसा देकर साथ ले गया था, ट्रेन से सूरत के वापी ले गया और जबरदस्ती दुष्कर्म किया। घर जाने की बात कहने पर पीटते हुए परिजनों को जान से मारने की धमकी दी। कई बार वहां से भागने का प्रयास भी किया था।
मामले की विवेचना कर विवेचक ने राजेश कुमार ने आरोपी को गिरफ्तार किया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान सत्र न्यायाधीश ने पक्ष व विपक्ष दोनों की दलीलें सुनीं। बयान और साक्ष्य के आधार पर उन्होंने आरोपी को दोषी करार दिया। बृहस्पतिवार को सत्र न्यायाधीश शेषमणि ने दोषी विवेक यादव उर्फ बउवा को सजा दी।