चित्रकूट। जिले में प्रीपेड मीटर की व्यवस्था समाप्त करने का आदेश जारी होने के बाद उपभोक्ताओं में खुशी का माहौल है। इस फैसले से जिले के करीब 30 हजार बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है, जिनके यहां ये मीटर लगाए गए थे। स्थानीय निवासियों और राजनीतिक दलों ने इन मीटरों के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन किए थे।
उपभोक्ताओं का कहना था कि स्मार्ट मीटर में मनमानी धनराशि देनी पड़ती थी और बिजली विभाग में उनकी कोई सुनवाई नहीं होती थी। आए दिन बिजली की आपूर्ति बंद कर दी जाती थी, जिससे उन्हें काफी परेशानी होती थी। जिले में जब से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए थे, तभी से इनका विरोध शुरू हो गया था। बिजली विभाग के अधिशासी अधिकारी सुरेंद्र कुमार कश्यप ने कहा कि सरकार के शासनादेश का पूरी तरह पालन किया जाएगा। जिले में कुल एक लाख 20 हजार बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें से 30 हजार उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए थे।
क्या बोले उपभोक्ता
व्यापारी राजीव लखानी ने बताया कि ऑनलाइन भुगतान के बाद भी बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाती थी, जिससे वे कई दिनों से परेशान थे।
व्यापारी नीलू गुप्ता ने कहा कि प्रीपेड मीटर के कारण व्यापारी मानसिक तनाव में रहते थे, उन्हें समझ नहीं आता था कि बिल चुकाएं या घर-गृहस्थी चलाएं।
वनकट गांव के यदुराज सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रीपेड मीटर लगाए गए थे, जिससे ग्रामीण परेशान थे। जमा की जाने वाली धनराशि का कोई स्पष्ट पता नहीं चलता था। प्रदेश सरकार के इस आदेश से ग्रामीण भी खुश हैं।
अधिवक्ता भरत भूषण ने कहा कि आदेश तो आ गया है लेकिन बिजली विभाग पर अभी भी भरोसा नहीं है। उन्होंने मांग की कि पहले की तरह पोस्टपेड मीटर की व्यवस्था पूरी तरह लागू की जानी चाहिए।
फोटो न 07 सीकेटीपी 10 यदुराज सिंह। संवाद
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