फोटो 26 सीकेटीपी-16- परिचय- खाद के लिए मानिकपुर खरीद केंद्र में लगी महिला किसानों की लाइन। संवा
चित्रकूट। रबी की फसल की शुरुआत होने से पहले ही डीएपी की किल्लत हो होने लगी। किसान सरसों सहित गेहूं की फसल की बोआई की तैयारी में जुट गए हैं। इसके लिए तैयारियां शुरु कर दी हैं। लगातार चार दिनों से किसान एक बोरी खाद के लिए सुबह से लाइन लगाता है। शाम तक आधे से भी कम किसानों को खाद मिल पा रही है। कई जगह टोकन बांटकर खाद देने की प्रक्रिया में किसानों ने केंद्र के सचिवों पर चहेतो को टोकन देने के आरोप लगाए हैं।
जिले में 48 केंद्र खुले हुए जहां मात्र पांच -पांच सौ बोरी खाद ही भेजी गई है। जबकि एक-एक केंद्रों में खाद लेने के लिए एक हजार से अधिक किसान पहुंच रहे हैं। कुछ ही देर में खाद केंद्रों में खत्म हो जाती है। खाद नहीं मिलने पर केंद्रों में विवाद हो रहा है। मानिकपुर, मऊ, सरैंया, शिवारमपुर व पहाड़ी उत्तरी केंद्र मेंं खाद लेने आए किसान राजेश्वर प्रसाद ने बताया कि सुबह 10 बजे लाइन में लगा था। दोपहर एक बजकर 20 मिनट में उसको एक बोरी खाद मिली।
भारतीय किसान यूनियन के तहसील अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह का कहना कि खाद की समस्या दूर करने के लिए मात्र कागजी कार्रवाई की जाती है। वास्तव में इसके निदान के लिए कोई कार्य नहीं किया जा रहा है । इस साल तो हालत अधिक खराब हैं। महिला किसानों को भी लंबी लाइनें लगानी पड़ी रही है।
अपने चहेतों को दे रहे टोकन
चित्रकूट। खाद लेने वाले किसानों को दिए जा रहे टोकन पर सवाल उठाए जा रहे हैं।कहा जा रहा कि ग्राम सचिव अपने चहेतों को ही टोकन दे रहे हैं। इससे जरूरत मंद किसानों को खाद नहीं मिल पा रही हैं। किसान सभा के प्रदेश कार्यकारणी के सदस्य रूद्र प्रसाद मिश्र कहना कि अधिकारियों व केंद्र सचिव की आपस में मिली भगत रहती है। प्राइवेट दुकानों में काला बाजारी हो रही है। इनके खिलाफ कार्रवाई में मात्र खाना पूर्ति ही जा रही है।
केंद्रों में खाद खत्म होने पर भेजी जा रही
चित्रकूट। जिला कृषि अधिकारी आरपी शुक्ला ने बताया कि जिन केंद्रों में खाद खत्म होने की जानकारी होती है। वहां पर बफर गोदाम में रखी खाद का आबंटन कर भेजी जा रही है। प्राइवेट दुकानों में भी खाद उपलब्ध है। यदि कोई परेशानी हो तो किसान इसकी शिकायत कृषि विभाग के अधिकारियों से करे।