प्रजापिता ब्रहृाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय व ग्राम्य विकास प्रभाग ने किसान सशक्तिकरण अभियान के तहत शहर के विकास भवन में गोष्ठी की। जिसमें जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। रसायनिक खादों के प्रयोग से इंसान भी बीमार हो रहा है और खेत की मिट्टी को भी नुकसान होता है।
गोष्ठी का शुभारंभ सीडीओ ए दिनेश कुमार ने किया। मुख्य अतिथि महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति नरेश चंद्र गौतम ने कहा कि दूध व सब्जी में कीटनाशक दवा का असर होेने से बीमारियां फैल रही है। यौगिक व जैविक खेती व प्राकृतिक उर्वरकों को प्रोत्साहित करें। हरियाणा के राजेंद्र ने बताया कि इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है कि किसान ऐसा उत्पादन करे जिससे मनुष्य को कोई हानि न हो।
इसके लिए किसानों को परम्परागत खेती अपनानी होगी। गाय के गोबर व मूत्र से बनी खाद का उपयोग करने से उपज तो बढ़ेगी ही साथ ही शुद्ध खाद्यान उत्पन्न होगा। ग्राम विकास प्रभाग की क्षेत्रीय संयोजिका ब्रहृाकुमारी रेखादेवी ने बताया कि 17 सितंबर को लखनऊ में प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किसान सशक्तिकरण अभियान का आरंभ किया है। यह अभियान 18 मंडलों में चलेगा।
जिसमें रथ यात्रा के माध्यम से जानकारी दी जाएगी। गोष्ठी में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर किसानोें को गोकुल की याद दिलाई गई। इस मौके पर उप कृषि निदेशक जगदीश नारायण, कृषि अधिकारी तुलसी राम, ब्रहृाकुमारी दुर्गेश नंदिनी, दीपिका व सुधा मौजूद रहे।
गोष्ठी के दौरान जैविक खाद्य बनाने की विधि बतायी गई। ब्रह्मकुमारी रेखादेवी ने बताया कि 10 किलो गोबर, 5 किलो गोमूत्र, 5 किलों गुड़, 2 किलों दाल का आटा, एक किलो पुराने पेड़ के नीचे की मिट्टी, को 200 लीटर पानी की टंकी में डाल कर रख दें।
कुछ दिन हिलाने के बाद खेतों में इस खाद को डाले। उपकृषि निदेशक जगदीश नारायण व जिला कृषि अधिकारी तुलसीराम ने भी कहा कि इस विधि से तैयार जैविक खाद से खेती को लाभ होगा।