खोही (चित्रकूट)। कागजों में टेंडर पास, धरातल पर कीचड़ और पथरीला रास्ता। यह तस्वीर है मध्य प्रदेश के चित्रकूट नयागांव नगर पंचायत के थरपहाड़ गांव की। यहां आज तक सड़क नहीं बनी। नतीजतन, बस्ती तक चार पहिया तो दूर एंबुलेंस भी नहीं पहुंचती।
शुक्रवार को थरपहाड़ बस्ती के गोरे सिंह की तबीयत बिगड़ी तो दावों की कलई खुल गई। परिजन 108 का इंतजार नहीं कर सके। कपड़े की झोली बनाई और बीमार को उसमें लादकर पगडंडी से अस्पताल की दौड़ लगाई। कोई खाट पर ढोता है, कोई झोली में यही यहां का एंबुलेंस मॉडल है। ग्रामीण राकेश, राजू ने बताया कि हर बार आश्वासन मिलता है कि टेंडर हो गया है, बजट आ रहा है लेकिन बस्ती तक आज भी वाहन नहीं जा पाता। बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं के लिए यह रास्ता रोज जंग से कम नहीं है। उधर, नगर पंचायत अधिशासी अधिकारी अंकित सोनी ने बताया कि स्वीकृति मिल गई है, बजट आते ही सड़क बनेगी। बजट कब आएगा और तब तक कितने गोरे सिंह झोली में ढोए जाएंगे...यह बड़ा सवाल है।