फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chitrakoot News: अस्पताल में अव्यवस्थाओं पर भड़के परिजन, हंगामा

Mon, 03 Nov 2025 10:53 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
विज्ञापन
28 सीकेटीपी-10- परिचय- घायलों को एंबुलेंस में लिटाते परिजन । संवाद
विज्ञापन
चित्रकूट। झांसी-मिर्जापुर हाईवे पर शनिवार रात को हुए सड़क हादसे में बोलेरो सवार आठ घायल अस्पताल लाए गए, तो बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की पोल खुल गई। इमरजेंसी में ही अव्यवस्थाएं नगर आईं। यहां न तो पर्याप्त डॉक्टर थे और न ही स्टाफ नर्सें। इमरजेंसी में मरीजों को देखने और उपचार मुहैया कराने के लिए केवल एक ही डॉक्टर थे। जबकि अस्पताल में आठ घायल आए थे। सभी घायल इलाज के लिए तड़प रहे थे। आक्सीजन की भी समुचित व्यवस्था नहीं थी। इससे परिजन नाराज हो गए और हंगामा करने लगे। यह देख अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों को बुलाने के संग लेबर रूम से नर्सें भी बुलाईं, तब कहीं जाकर घायलों को प्राथमिक उपचार मिल सका। परीक्षण में डॉक्टरों ने तीन को मृत घोषित किया। जबकि नाजुक हालत देख डॉक्टरों ने घायलों को प्रयागराज रेफर करना शुरू किया।
विज्ञापन

सबसे पहले डॉक्टरों की टीम ने घायल राजा भइया व उनकी पत्नी शोभा देवी को प्रयागराज रेफर किया। फौरन एक एंबुलेंस घायल दंपती को लेकर वहां से निकली। देखते ही देखते इमरजेंसी में अन्य घायल मरीजों को भी प्रयागराज रेफर की पर्ची थमा दी गई। घायलों को फौरन ले जाने के लिए स्ट्रेचर से बाहर लाए, तब पता चला कि अस्पताल में और कोई एंबुलेंस नहीं है। एंबुलेंस न होने पर परिजन बवाल तो कर रहे थे, परिसर में चीख पुकार भी मच गई।
वक्त की नजाकत को देख पुलिस फोर्स ने बाहर लाए गए रेफर घायलों को फिर इमरजेंसी वार्ड में पहुंचाए। उन्हें सिलिंडर से आक्सीजन भी दी गई। इसी बीच एसपी अरुण कुमार सिंह, एडीएम उमेश चंद्र निगम समेत अन्य अफसर भी अस्पताल पहुंच गए। सदर कोतवाल श्याम प्रताप पटेल, भरतकूप के उपेंद्र प्रताप सिंह, पहाड़ी के प्रवीण सिंह सहित कई थानों की फोर्स भी पहुंचा। सदर विधायक अनिल प्रधान भी पहुंच गए। सभी ने समझा-बुझाकर शांत कराया। करीब 10 मिनट बाद एंबुलेंस वहां पर पहुंची तो परिजन शांत हुए। बाद में दो एंबुलेंस पहुंची, तब तीन घायलों को प्रयागराज रवाना किया गया। उधर, सोमवार प्रयागराज में घायल राजा भइया ने दम तोड़ दिया।
विज्ञापन

-
20 बेड की इमरजेंसी मगर स्टाफ सात बेड का
चित्रकूट। जिला अस्पताल में पहले इमरजेंसी सात बेड की होती है। इसमें एक डॉक्टर, दो स्टाफ नर्स, वार्ड बॉय की तैनाती रहती है। अब इमरजेंसी में बेड़ों की संख्या बढ़ाकर 20 कर दी गई, मगर कर्मचारी सात बेड के हिसाब से हैं। 20 बेड के हिसाब से कर्मचारी पूरे नहीं किए गए। ऐसे में बड़ी दुर्घटना होने पर कर्मचारियों की समस्या होती है। फिर दूसरे डाॅक्टरों सहित अन्य कर्मचारियों को फोन कर बुलाया जाता है। तब जाकर घायलों का इलाज होता है या फिर रेफर कर दिया जाता है। सीएमएस डॉ. शैलेंद्र कुमार ने बताया कि इमरजेंसी में बढ़ती मरीजों की संख्या को देख बेड बढ़ाए गए हैं। कर्मचारियों की कमी है। तैनाती के लिए पत्राचार किया गया है। आपातकाल में आवास में रहने वाले डाॅक्टरों को बुलाया जाता है। (संवाद)
-
अक्सर गायब रहतीं एंबुलेंस
चित्रकूट। जिला अस्पताल से रेफर मरीजों को ले जाने के लिए तीन एएलएस एंबुलेंस की तैनाती है। जो इमरजेंसी में गंभीर मरीजों को ले जाती हैं लेकिन ये अक्सर एंबुलेंस गायब रहती हैं। कॉल करने पर काफी देर बाद अस्पताल पहुंचती हैं। रविवार रात को सड़क दुर्घटना ने एंबुलेंस व्यवस्था की पोल खोल दी। एएलएस के प्रभारी आशुतोष चतुर्वेदी का कहना है कि जिला अस्पताल में एंबुलेंस खड़ी होने की जगह नहीं है। इससे करीब सात सौ मीटर दूर एंबुलेंस खड़ी होती है। जो सूचना पर अस्पताल जाती हैं। वहीं 108 के जिला प्रभारी सोनेंद्र शुक्ला का कहना है कि घटना स्थल से 108 एंबुलेंस के माध्यम से ही घायलों को जिला अस्पताल लाया गया है। (संवाद)

28 सीकेटीपी-10- परिचय- घायलों को एंबुलेंस में लिटाते परिजन । संवाद

28 सीकेटीपी-10- परिचय- घायलों को एंबुलेंस में लिटाते परिजन । संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें