बांदा। मानसून के मौसम में भी तीन माह खनन माफिया और खदान ठेकेदारों की कमाई कम नहीं होती। वह कमाई की ‘जंप’ बालू के डंप से लगाते हैं। अगले हफ्ते पहली जुलाई से यह खेल शुरु हो जाएगा। माफिया और कारोबारियों ने इसकी तैयारी कर ली है। मौरंग के कारोबार में खनन से लेकर डंपिंग व परिवहन सब अवैध है।
खनिज विभाग से लगभग दो दर्जन डंप लाइसेंस/परमिट हासिल कर लिए गए हैं। इनकी कुल भंडारण क्षमता लगभग 15 लाख घन मीटर है। जो तीन माह के लिए नाकाफी है। जाहिर है कि डंप की आड़ में नदियों से अवैध खनन जारी रहेगा। बालू की कीमत भी काफी बढ़ा दी जाएगी। 30 से 40 हजार का ट्रक 60 से 80 हजार तक में बिकेगा। आम आदमी को घर बनाना और महंगा हो जाएगा।
डंप परमिट हासिल करने वालों ने जनपद की चार तहसीलों बांदा, नरैनी, बबेरू और पैलानी के गांवों में केन व यमुना नदियों से बालू का भंडार करना चालू कर दिया है। सबसे ज्यादा 12 लाइसेंस बांदा तहसील के हैं। नरैनी में 6, बबेरू में 5 और पैलानी तहसील में तीन डंप लाइसेंस हैं। कुछ लाइसेंस एक से डेढ़ लाख घन मीटर बालू भंडारण के हैं। बाकी इससे कम के हैं।