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देश की संस्कृति के माध्यम से भौतिक प्रगति लाने का हो रहा प्रयास

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फोटो- 6- क्षेत्रीय वैदिक सम्मेलन का शुभारंभ करते प्रदेश शासन के ग्राम विकास पंचायती राज के प्रमुख ? - फोटो : CHITRAKUTT
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चित्रकूट। तीन दिवसीय वैदिक सम्मेलन बृहस्पतिवार को मानिकपुर ऐंचवारा स्थित श्री स्वामी भगवान भाष्करानंद देव जू महाराज संस्कृत वेद पाठशाला में शुरू हुआ। सम्मेलन के पहले दिन वेद व वेद पाठशाला के उद्देश्यों विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही यह भी कहा गया कि पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव के कारण लोग वैदिक काल को भूलते जा रहे हैं। अब समय आ गया है कि एक बार फिर से वेदों का अध्ययन कराया जाए।
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श्री स्वामी भगवान भाष्करानंद देव जू महाराज संस्कृत वेद पाठशाला ऐंचवारा व महर्षि संदीपन राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान उज्जैन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वैदिक सम्मेलन का शुभारंभ प्रदेश सरकार के प्रमुख ग्राम्य विकास पंचायती राज अनुराग श्रीवास्तव ने किया। उन्होंने बताया कि शोभन आश्रम में भारत देश की संस्कृति के माध्यम से भौतिक प्रगति लाने का प्रयास हो रहा है। इसमें गोबर से बनने वाली वस्तु तैयार करना, साथ ही गोशाला खोलना प्रमुख है। जैविक खेती के प्रति भी किसानों को प्रेरणा दी जा रही है। निश्चित रूप से इस कार्य से किसानों का भला होगा। उन्होेंने आश्वासन दिया कि आश्रम में खुलने वाले सभी प्रकल्पों के लिए वह सहयोग करेंगे।
सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि जिलाधिकारी शेषमणि पांडेय ने शोभन सरकार आश्रम में चल रहे प्रकल्पों की सराहना की। कहा कि इस वैदिक सम्मेलन से यहां के बाशिंदों को वेद के अध्ययन का लाभ मिलेगा। कामदगिरि प्रमुख द्वार के संत मदन दास ने कहा कि जिले में कई संस्कृत विद्यालय उपेक्षा के शिकार हैं। इनकी व्यवस्था दुरुस्त करने की आवश्यकता है।
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कार्यक्रम के संयोजक जगद्गुरु रामभद्राचार्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश दुबे ने कहा कि भारत देश वैदिक काल से विश्व को राह दिखाने का कार्य करता आ रहा है, जिसमें वेदों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि भारत पर आक्रमण के दौरान विदेशियों ने वेदों को नष्ट किया। कई विदेशी वेदों को अपने देश ले गए और उसका अध्ययन कर गणित के सिद्धांत व वैज्ञानिक सूत्रों के माध्यम से अपने-अपने देश का विकास किया। साथ ही यह भी कहा कि पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव के कारण लोग वैदिक काल को भूलते गए। अब समय आ गया है कि एक बार फिर से वेदों का अध्ययन कराया जाए।
सद्गुरु चरण सेवा समिति शोभन आश्रम ऐंचवारा के अध्यक्ष रमेश चंद्र शुक्ल ने कहा कि देश में वेद, धर्म व विज्ञान पर चर्चा की जाती है, लेकिन अधिकांश लोग विज्ञान पर ही विश्वास करते है। निश्चित रूप वेद ही विज्ञान का स्वरूप है। वेदों के अध्ययन से ही असली विज्ञान का मतलब सीखा जा सकता है।
सद्गुरु चरण सेवा समिति शोभन आश्रम के प्रबंधक संत ओम बाबा ने कहा कि वह लगातार प्रयास कर रहे कि अन्ना मवेशियों की समस्या का निदान किया जाए। इसके लिए आश्रम में नये प्रकल्प खोलने के प्रयास में लगे हैं। वह बायोगैस प्लाट लगाने जा रहे हैं। इसके साथ ही गोबर मशीन के माध्यम से लकड़ी बनाने का कार्य किया जा रहा है। वेद विश्वविद्यालय खोलने के प्रयास में भी लगे हैं।
कार्यक्रम का संचालन समिति के निदेशक हरिकांत मिश्र व गणेश प्रसाद मिश्र ने किया। इस मौके पर कार्यक्रम के सह संयोजक रामप्रकाश अग्रवाल, वेद पाठशाला के प्रधानाचार्य प्रणव पण्डा व विनोद सागर त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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वेदमंत्रों व शंख की ध्वनि के बीच निकली शोभायात्रा
चित्रकूट। वैदिक सम्मेलन के शुभारंभ से पहले महर्षि वाल्मीकि आश्रम से वेद पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं व ग्रामीणों ने आश्रम से शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा में शंख की ध्वनि व वेदमंत्रों के उच्चारण से समूचा वातावरण गूंज उठा।
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