चित्रकूट। नहरों और माइनरों की सफाई न होने से किसानों की मुसीबतें बढ़ी हैं। एक तो जिम्मेदारों ने इनकी सफाई नहीं कराई, दूसरे नहरों में पानी छोड़ने में भी हीलाहवाली की जा रही है। टेल तक पानी न पहुंचने से किसानों की फसलें सूखने के कगार में पहुंच गईं हैं। उधर,सिचाई विभाग के अफसर नहरों व माइनरों की सफाई के लिए बजट न मिलने का रोना रो रहे हैं।
जिले में सिंचाई विभाग के तीन खंड हैं, इनमें लघु डाल, सिंचाई निर्माण खंड व सिंचाई विभाग प्रथम खंड शामिल हैं। इन खंडों से नहरों का संचालन किया जाता है। यह ही नहरों की सफाई कराने के लेकर पानी छोड़ने तक व्यवस्था संभालते हैं। बावजूद इसके जिले में नहरों की सफाई नहीं कराई गई है। इनमें वनकट पंप कैनाल नहर, मानिकपुर क्षेत्र की पूरबी नहर, गुंता बांध से बछरन गांव तक जाने वाली नहर की सफाई नहीं की गई।
कई अन्य नहरों व माइनरों में भी सफाई के नाम पर खानपूर्ति की गई है। इसके अलावा पंप कैनालों के उपकरण भी सही नहीं कराए गए हैं। इससे समस्याएं बरकरार हैं। किसान सभा के प्रदेश सचिव रुद्र प्रसाद मिश्रा का कहना कि सिंचाई विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर कभी निरीक्षण नहीं करते हैं। शासन से मिलने वाले बजट को ठिकाना लगा देते हैं।
भारतीय किसान यूनियन के तहसील अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह का कहना है कि नहरों की सफाई नहीं की गई। इससे नहरों की हालत बहुत खराब है। नहरों में पानी छोड़ने से टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इससे कई गांव के किसान के खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। बरवारा गांव के किसान राजबहादुर कहना कि वनकट नहर नहीं चलने से उसकी फसल सूख गई।
-
किसानों का भरोसा टूटा
चित्रकूट। मंदाकिनी नदी, यमुना नदी, बरुवा बांध, रसिन बांध, गुंता बांध व ओहन बांध से नहरों का संचालन होता है। इस बार बांधों में भी पानी भरा पड़ा है। किसान आकाश सिंह कहना कि किसानों का भरोसा था कि इस बार सिंचाई के लिए नहरों से भरपूर पानी मिलेगा। इसके बाद भी नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। नहरों की सफाई नहीं की जा रही है। (संवाद)
अन्य मद से कराई जा रही सफाई
सिंचाई विभाग के लघु डाल के एसडीओ नितिन कुमार ने बताया कि नहरों की सफाई के लिए बजट नहीं मिला है। सिंचाई विभाग नहरों के मरम्मत के लिए मिलने वाले बजट से अभी सफाई कराई जा रही है। बजट के लिए प्रक्रिया चल रही है।
05 सीकेटीपी-13- परिचय- कसहाई मार्ग के पास से गुजरी माइनर में गंदगी। संवाद