चित्रकूट। कोरोना वायरस के संक्रमण की जिसे जानकारी होती है, वह एक दूसरे से दूर ही भागता है, लेकिन जिले में ऐसे भी संकट के सिपाही हैं जो अपने कर्त्तव्य से एक कदम भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। इस महामारी को सुनकर आमतौर पर लोग उस दिशा या गली मोहल्ले में जाने से भी परहेज करते हैं पर हमारे अस्पताल के कुछ ऐसे भी लोग हैं जो इससे हाथ आजमाने में भी पीछे नहीं हैं। अबतक चित्रकूट जिले में एक भी कोरोना पाजिटिव मरीज नहीं मिला है इसके बावजूद छह हजार से ज्यादा ऐसे संदिग्ध बाहर से आए और जनपदवासियों की जांच करने वाले इन संकट के सिपाहियों को सभी सलाम कर रहे हैं। यह सब अपने ही बीच के कई लोगों के सैंपल भी लखनऊ भेज रहे हैं पर उनका जज्बा देखने लायक है। वह बिना डरे कम संसाधन के बावजूद अपनी ड्यूटी पर दिन-रात डटे हैं। इन्हें अपने परिजनों से सिर्फ टेलीफोन पर ही बात करने को मिल रहा है। कई माह से घर नहीं गए।
चित्रकूट। जिला अस्पताल में तैनात मूलरूप से मध्यप्रदेश के निवासी डा.पीडी चौधरी ने बताया कि हम सब अपने काम पर दिन रात डटे हैं। पूरी सुरक्षा किट के साथ वह मरीजों का इलाज कर रहे हैं। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद से अब तक खुद ही अपना भोजन बना रहे हैं। अस्पताल के पीछे के आवास में अकेले कमरे में रहते हैं। खुद अपने कपडे प्रतिदिन धोकर 24 घंटे अस्पताल में मरीजों के काम में डटे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि परिजनों से टेलीफोन से ही बात होती है तो सभी कोरोना से बचने की सलाह देते हैं। वह भी अपनी पत्नी व बच्चों का हालचाल जानने का प्रयास करते हैं।
चित्रकूट। जिला अस्पताल में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की जांच के लिए अधिकृत डॉ. बीएस द्विवेदी मूल रूप से प्रयागराज जिले के हैं। उन्होंने बताया कि होली के बाद से वह घर नहीं गए और यहां हर मरीज का पूरी तन्मयता से इलाज करने में जुटे हैं। पुरानी बाजार स्थित डाक्टर्स कालोनी में अकेले रहते हैं। बताया कि अस्पताल से जाने के बाद खुद पूरे कपड़े बदलकर धोते हैं। इसके बाद खाना बनाकर खाते हैं। इसी बीच परिजनों से बात कर हाल चाल लेते हैं। परिजन भी उनका लगातार कर्त्तव्य निभाने के लिए हौसला बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी मरीज को घबराने की जरूरत नहीं हैं।
चित्रकूट। डाक्टर व स्टाफ को कोरोना वायरस से निपटने के लिए बनाए गए ट्रेनर डा. एचसी अग्रवाल का कहना है कि ईश्वर पर भरोसा कर अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। कोरोना भय का मामला नहीं है, इसका सामना करने के लिए जिले की टीम तैयार है। हर डाक्टर व स्टाफ को बताया गया है कि इससे डरना नहीं डराना है ताकि यह भारत देश से दूर भाग जाए। एक बेटी डाक्टर की पढ़ाई कर रही है। वह हमेशा फोन पर पिता से सलाह लेती है। पत्नी व अन्य बच्चे यहीं रहते हैं। बताया कि जब डयूटी कर घर आते हैं तो दरवाजे पर सैनिटाइज कर सीधे बाथरूम जाते हैं। पूरे कपड़े बदलकर फिर खाना खाते हैं।