संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। करोड़ों रुपये के कोषागार घोटाले में नामजद सहायक लेखाकार संदीप श्रीवास्तव की मौत ने विभाग से लेकर सियासी गलियारे में भी हलचल मचा दी है। प्रयागराज में इलाज के दौरान हुई उनकी मौत के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह महज एक संयोग है या फिर बड़े अधिकारियों को बचाने के लिए रची गई साजिश।
जिले के कोषागार में पेंशनरों के खातों में 43.13 करोड़ रुपये के अनियमित भुगतान का मामला सामने आया था। इस प्रकरण में वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने चार कोषागार कर्मियों, जिनमें एक सेवानिवृत्त सहायक कोषाधिकारी भी शामिल हैं, और 93 पेंशनरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
इन्हीं आरोपियों में से एक संदीप श्रीवास्तव की हाल ही में इलाज के दौरान मौत हो गई। सूत्रों का कहना है कि यह घोटाला केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित नहीं हो सकता। दिसंबर 2014 से अब तक तीन अलग-अलग वरिष्ठ कोषाधिकारी—कमलेश कुमार, शैलेश कुमार और वर्तमान में रमेश सिंह इस पद पर रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या बिना उच्चाधिकारियों की जानकारी के करोड़ों रुपये का गबन संभव है।
समाजवादी पार्टी सांसद कृष्णा देवी शिवशंकर पटेल ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के संरक्षण में अधिकारियों ने पेंशन भुगतान के नाम पर जनता के धन की लूट की है। सांसद ने अखिलेश यादव को लिखे पत्र में कहा है कि यह मामला लोकसभा में उठाया जाना चाहिए ताकि भ्रष्टाचार के कुचक्र का पर्दाफाश हो सके।
वहीं जनता दल यूनाइटेड (उत्तर प्रदेश) की प्रदेश उपाध्यक्ष एवं बुंदेलखंड प्रभारी शालिनी सिंह पटेल ने इस घटना को सिस्टम पर कलंक बताया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक मौत नहीं बल्कि प्रशासनिक तंत्र पर सवाल है। शालिनी ने प्रदेश सरकार से इस प्रकरण की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है। कहा कि जनता जानना चाहती है कि आखिर वे कौन लोग हैं जो हर बार घोटाले की कड़ियां जुड़ने से पहले ही उन्हें काट देते हैं।