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रामचरित मानस न होती तो लोप हो जाते आदर्श व सिद्धांत

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चित्रकूट। राष्ट्रीय रामायण मेला में मंगलवार को प्रथम सत्र के दौरान राम कथा मर्मज्ञों ने रामचरित मानस की उपयोगिता और राष्ट्रहित में योगदान को बताया। बताया कि श्रीराम वनवास काल के दौरान चित्रकूट परिक्षेत्र में न आए होते तो इस परिक्षेत्र के लोग संस्कृति, संस्कारों में और भी पिछड़ जाते।
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गोष्ठी के प्रथम सत्र में रामायणी जयपाल सिंह ने कहा कि यदि भगवान राम की कथा न गई लिखी होती तो जीवन के आदर्श और मर्यादाओं, सिद्धांतों का लोप हो जाता। तुलसी दास ने संस्कृति-शिष्टाचार का मार्मिक ढंग से वर्णन किया है।
आकाशवाणी छतरपुर के वक्ता पं. जगप्रसाद तिवारी ने कहा कि यदि हमें जीवन जीना है, तो रामचरितमानस का अध्ययन करना होगा।
द्वितीय सत्र में साहित्यकार डॉ. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ने बताया कि गोस्वामी तुलसी दास की एक दुर्लभ शगुन सुमंगल रामायण मिली है। हस्त निर्मित है। इसमें सात सर्ग हैं। शगुन सुमंगल रामायण में यह भी बताया गया है कि तुलसी का कानन शगुन रूप में दिख जाए तो रामभक्ति का मनोरथ पूर्ण होता है।
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रामायण मेला समिति के उपमंत्री व सामाजिक समिति के चिंतक प्रद्मुन कुमार दुबे ने कहा कि भगवान राम का अवतरण सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन में एक नई क्रांति का संचार करने वाला है।
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