फोटो नंबर- 6- भरतकूप के अकबरपुर के मजदूरों का हाल
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भरतकूप (चित्रकूट) क्षेत्र मेें क्रशर उद्योग सहित पत्थर की खदानों में काम करने वाले हजारों आदिवासियों पर लॉकडाउन से रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। परिवार के अधिकतर सदस्य सूखी रोटी व फीकी सब्जी खाकर जीवन व्यतीत कर रहे हैं। जिसमें कई ऐसी महिलाएं है जिन्होंने नवजात बच्चों का जन्म दिया है जिनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक आहार व दूध जरूरी है। आर्थिक तंगी के कारण यह सब वह नहीं खरीद पा रहे है।
भरतकूप क्षेत्र में आधा सैकड़ा से अधिक क्रशर की मशीनें लगी है। इसी क्षेत्र में कई पत्थर की खदानें भी है जहां हजारों कोल मजदूर कार्य करते हैं। इनकी बस्ती भरतकूप कस्बे सहित आसपास के क्षेत्र में बसी हुई है। ऐसी ही बस्ती अकबरपुर ग्राम पंचायत के बुद्ध नगर में पांच सौ की आबादी बसी है। जिसमें अधिकतर मजदूर परिवार रहते हैं। जो भरतकूप क्षेत्र रहते है लॉकडान होने के बाद क्रशर उद्योग बंद हो गए है। वह अपनी व्यथा व्यतीत करते है। कई ऐसे मजदूर है जिनके पास न तो आधार कार्ड है न ही अंत्योदय योजना के तहत राशन कार्ड हैं। जब से लॉकडाउन शुरू हुआ है। तब से समस्या खड़ी हो गई है। किसी तरह से फीकी सब्जी व नमक रोटी खाकर जीवन व्यतीत कर रहे है।
परिवार की आर्थिक स्थिति खराब
चित्रकूट। अकबरपुर गांव की बुद्ध नगर की रहने वाली कृष्णा ने बताया कि एक सप्ताह पहले उसने बच्ची को जन्म दिया था। बताया कि परिवार की आर्थिक स्थित पूरी तरह से खराब होने पर उनकी मौसी ने खद्यान्न की व्यवस्था किया है। डाक्टरों ने बताया कि प्रसव के बाद दूध पीने सहित पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी थी। लॉकडाउन होने से उसके पति सहित परिवार के सदस्य बेरोजगार हो गए है। प्रशासन के कई अधिकारी व कई क्रशर उद्योग संचालक बस्ती में जाकर सहायता भी कर रहे हैं।