फोटो 28 सीकेटीपी-13- परिचय- शरद पूर्णिमा पर अमृत पाने के लिए परिक्रमा मार्ग पर खीर बनाते श्रद्
चित्रकूट। शरद पूर्णिमा पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मनगरी पहुंचे। रामघाट में उन्होंने मंदाकिनी नदी में स्नान कर भगवान कामदनाथ के दर्शन किए और कामदगिरि की परिक्रमा लगाई। मठ-मंदिरों में भजन, कीर्तन और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए।
इस बार शरद पूर्णिमा दो दिन मनाई जा रही है। पहले दिन सोमवार को विशेष रूप से बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामघाट पहुंचे। संत नवलेश दीक्षित ने बताया कि पूर्णिमा तिथि के अनुसार 6 अक्तूबर को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से पर्व की शुरुआत हुई और 7 अक्तूबर को 9 बजकर 16 मिनट तक इसका समापन होगा।
संत दिव्य जीवनदास ने बताया कि चंद्रमा सौलह कलाओं से युक्त होता है और इसके दर्शन से कल्याण होता है। इस अवसर पर श्रद्धालु चांद की रोशनी में खीर बनाते हैं और रात को खुले आसमान में रख देते हैं। ओस की बूंदें खीर में पड़ती हैं, जिन्हें अमृत समान माना जाता है।
धर्मनगरी में आए श्वास रोग से पीड़ित श्रद्धालु खीर में आयुर्वेदिक दवा मिलाकर सेवन करते हैं। महोबा, रीवा और सागर से आए भक्तों ने बताया कि इस पर्व से उन्हें राहत मिलती है और स्वास्थ्य लाभ होता है।
फोटो 28 सीकेटीपी-13- परिचय- शरद पूर्णिमा पर अमृत पाने के लिए परिक्रमा मार्ग पर खीर बनाते श्रद्
फोटो 28 सीकेटीपी-13- परिचय- शरद पूर्णिमा पर अमृत पाने के लिए परिक्रमा मार्ग पर खीर बनाते श्रद्