सुधीर अग्रवाल
चित्रकूट। कहा जाए कि डकैतों के मरने का मौसम ‘जुलाई-अगस्त’ शुरू हो गया तो गलत नहीं होगा। इलाहाबाद के फूलपुर में चित्रकूट के एक लाख के ईनामी डकैत महेंद्र पासी उर्फ धोनी को बुधवार की देर रात पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने से इसकी शुरूआत हो गई। पिछले साल बबुली कोल गिरोह के शारदा कोल को अगस्त माह में पुलिस ने मुठभेड में ढेर कर दिया था। ददुआ, ठोकिया, बलखडिया और ललित पटेल जैसे पाठा के ज्यादातर डकैत इन्हीं महीनों ‘सावन-भादों’ मे ही मारे गए है। हालांकि इसी महीने में पुलिस को भी मुठभेड़ में जान गवानी पड़ी है। यूपी-एमपी पुलिस को सावन भादों का इंतजार था।
चित्रकूट के रैपुरा थानांतर्गत गौरिया देशाह गांव का रहने वाला महेंद्र पासी के ऊपर यूपी से 50 हजार और एमपी से 50 कुल एक लाख का ईनाम था। दस्यु सरगना गोप्पा यादव के तथाकथित मुठभेड़ में गिरफ्तार हो जाने के बाद महेंद्र पासी ने गैंग का सरदार बनने के लिए गोप्पा के भांजे रजउवा यादव को मौत के घाट उतार दिया था। रजउवा की लाश कई दिन बाद पुलिस ने मानिकपुर के जंगलों से बरामद की थी। बुधवार देर रात महेंद्र पासी को इलाहाबाद की फूलपुर थाने की पुलिस ने इफ्कों के राख तालाब के समीप घेर लिया था। दोनों ओर से 1 घंटे गोलियां चलीं। पुलिस की गोली महेंद्र के सिर में लग गई। मौके पर उसकी मौत हो गई। उसका साथी बच निकला। पुलिस ने मौके से पिस्टल और डबल बैरल बंदूक बरामद की है। मुठभेड़ में इंस्पेक्टर संजय कुमार राय के बांह में डकैतों की गोली लगी है। महेंद्र पासी की मौत से एक बार फिर साबित हो गया कि जुलाई-अगस्त के महीना डकैतों के लिए काल बने है। बीते साल 24 अगस्त को पुलिस की डाकू बबुली कोल गैंग से मुठभेड़ हुई थी। मुठभेड़ में गैंग का खास साथी शारदा कोल ढेर हो गया था। इसी तरह 23 जुलाई 2007 को पुलिस ने मुठभेड़ में ददुआ को दस साथियों सहित ढेर कर दिया था। 2 जुलाई 2015 को मुठभेड़ में स्वदेश पटेल उर्फ बलखड़िया मारा गया था। पिछले साल अगस्त माह में एमपी पुलिस ने ललित पटेल को मुठभेड़ में मार गिराया था। कई और डकैत भी इन्हीं महीनों में मारे गए है।