चित्रकूट। धर्मनगरी में 15 दशक से चली आ रही भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा इस वर्ष भी कोरोना संक्रमण के चलते नहीं होगी। कोरोना काल के चलते इस यात्रा पर भी संकट आ गया है। इसके बावजूद पूरा रथ तैयार कर भगवान को बैठाया जाएगा और भक्तों को दर्शन के लिए कोविड नियमों के तहत तरौंहा के अखाडे़ में आने दिया जाएगा।
जयदेव दास अखाड़ा के व्यवस्थापक रमाशंकर दास ने बताया कि अखाड़े से लगभग डेढ़ सौ साल से भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा नौ दिन के लिए निकलती थी जो विभिन्न स्थानों में पड़ाव करते हुए सोनेपुर में विश्राम के दूसरे दिन मेला लगता था। हालांकि जिन स्थानों पर रथ यात्रा पहुंचती वहां मेले का माहौल रहता था। लगातार नौ दिन तक रथ यात्रा को देखने के लिए दूरदराज से लोग आते रहे है। रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा के साथ मां जानकी के नाराज होने पर स्थान छोड़ कर चले गए थे। मां जानकी उन्हें पुन: वापस मनाकर ले आई थी। यह परंपरा लगातार जिले में चली आ रही है। बीते वर्ष से कोरोना संक्रमण होने के चलते रथ यात्रा प्रतिबंधित है। हालांकि भगवान जगन्नाथ को अखाड़े के बाहर रथ में बैठाकर कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए नौ दिन तक कार्यक्रम किए जाते हैं जो इस बार भी होंगे।