फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ताम्र पाषाणिक संस्कृति से जुड़ी सामग्री मिली

Thu, 28 Sep 2017 09:13 PM IST
चित्रकूट
विज्ञापन
कलवलिया में खुदाई करते शोधार्थी व अन्य। - फोटो : amarujala
विज्ञापन
चित्रकूट। गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली राजापुर के पास संदवावीर टीले के पास लगातार दूसरे दिन भी ऐतिहासिक प्रमाण की वस्तुएं मिलीं। ताम्र पाषाणिक संस्कृति से जुड़ी लोहे की खुरपी, हड्डी के उपकरण, चूल्हे व अग्नि जलाने के साक्ष्य मिले हैं।
विज्ञापन

राष्ट्रीय पुनर्वास लखनऊ व उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग की टीम के अधिकारी संयुक्त रूप से कलविलया गांव के संदवावीर टीले के आस पास गुरुवार को भी डटे रहे। कुछ स्थानीय लोगों की मदद से टीम के शोधार्थी झांसी निवासी अशोक मुस्तारिया व छींबों निवासी शिवप्रेम याज्ञिक, ज्ञानेंद्र प्रकाश व कौशिक लगातार अधिकारियों के निर्देश पर चिह्नित स्थानों पर बेहद सावधानी से खुदाई कर रहे हैं। राष्ट्रीय पुनर्वास विभाग लखनऊ के हेड डॉ.अवनीश चंद्र मिश्र ने बताया कि गुरुवार को दिन भर खुदाई में उत्तरी काली चमकीली पात्र से जुड़ी मिट्टी मिली है। इसके नीचे लोहे की खुरपी, हड्डी के उपकरण समेत कई ताम्र पाषाणिक संस्कृति से जुड़ी कीमती सामग्री मिली है। जिसकी बारीकी से जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि पुरातत्व सर्वेक्षण भारत सरकार नई दिल्ली की अनुमति के बाद राज्य सरकार सांस्कृतिक विभाग पुरातत्व विभाग की अनापत्ति मिलने पर खुदाई कराई जा रही है। सबसे पहले यहां टीले की मिट्टी की सतह देखकर ही शक हुआ था। जिसके बाद भारत सरकार के पुरातत्व विभाग से अनुमति मांगी गई थी।
--इनसेट
क्या है ताम्र पाषाणिक संस्कृति
चित्रकूट। राष्ट्रीय पुनर्वास विभाग लखनऊ के हेड डॉ. मिश्र ने बताया कि ताम्र्र पाषाणिक संस्कृति एक मेजर डिवीजन है। पाषाण काल, नव पाषाण काल फिर इतिहास पढ़ा जाता है। पाषाण काल में ही पुरा, मध्य व नवपाषाण भी शामिल है। इसी नव पाषाण के बाद ही ताम्र पाषाण संस्कृति होती है। जिसमें तांबे व लोहे के अलावा कई अनोखे बर्तन की सामग्री मिलती है। कलवलिया में यह काम छह या सात अक्टूबर तक चलेगा। शोधार्थी इस काम में मदद कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें