मंडलायुक्त मुरलीधर दुबे की अध्यक्षता में तहसील कर्वी सभागार में तहसील
दिवस का आयोजन किया गया। इस मौके पर कमिश्नर ने लंबित पड़े प्रार्थनापत्रों
पर रोष जताया और कहा कि जिले में तहसील दिवस के प्रार्थना पत्र समय से
निस्तारित न होने से मंडल की पोजीशन खराब होती है।
मंडलायुक्त ने
समीक्षा में पाया कि कृषि विभाग के तीन, स्वास्थ्य विभाग का एक, जल निगम के
11, विकास का एक, नगर निकाय के चार, पंचायती राज के सात, बैंक के 11,
परिवहन का एक, शिक्षा के छह पशुधन का एक, बाल विकास के तीन, राजस्व के 104,
लघु सिंचाई के 10, लोक निर्माण के तीन, वन विभाग के दो, विकलांग कल्याण के
एक, विद्युत के 29, समाज कल्याण के चार, श्रम के एक, सहकारिता विभाग के
दो, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण के छह, खाद्य एवं रसद के सात, ग्राम्य विकास
के 30, चकबंदी के 16, पुलिस के 56 कुल मिलाकर 321 प्रार्थनापत्र अनिस्तारित
मिले।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शिकायती पत्रों को समय से निस्तारित
करें। जिन विभागों के अधिकारियों ने पत्रों का निस्तारित कर दिए हैं, उसकी
सूचना संबंधित विभाग को दें। उन्होंने कहा कि जिला चित्रकूट के तहसील दिवस
के प्रार्थनापत्र निस्तारण न होने से मंडल की पोजीशन खराब होती है, इसलिए
अधिकारी व्यक्तिगत ध्यान देकर इनका निस्तारण करें।
जिलाधिकारी नीलम अहलावत
ने आगाह किया कि जो भी अधिकारी तहसील दिवस में आए प्रार्थनापत्रों का समय
से निस्तारण न करेगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। आज की तहसील
दिवस में कुल 126 प्रार्थनापत्र आए, जिनमें से चार का मौके पर निस्तारण
किया गया। मुख्य चिकित्साधिकारी ने 50 विकलांग प्रमाणपत्र बनाए। इस दौरान
पुलिस अधीक्षक स्वामी प्रसाद, मुख्य विकास अधिकारी एनपी सिंह, मुख्य
चिकित्साधिकारी डा. वेदप्रकाश, उप जिलाधिकारी नरेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।