चित्रकूट में जुआ खेलने के मामले में जिला जेल में निरुद्ध बंदी की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। परिजनों ने पुलिस टीम पर पिटाई कर हत्या का आरोप लगाया है। आक्रोशित परिजनों ने पहले जिला अस्पताल परिसर फिर डीएम कार्यालय के सामने हंगामा किया और दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है।
जिलाधिकारी ने दो डाक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराने और मजिस्ट्रेटी जांच कराने के आदेश दिए हैं। मृतक अर्जुन को आईजी की टीम ने दो दिन पहले जुआ खेलते पकड़ा था। सोमवार को जिला जेल रगौली के आइसोलेट बैरक में बंद बांदा जिले के बिसंडा थाना अंतर्गत पुनाहुर गांव का अर्जुन सिंह (32) पुत्र गंगादीन की सोमवार की सुबह अचानक तबियत बिगड़ गई।
जानकारी पर जेल अधीक्षक अशोक सागर के निर्देश पर बंदीरक्षक उसे जेल के अस्पताल में ले गये। सांस लेने में ज्यादा परेशानी होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया। सुबह लगभग छह बजकर 35 मिनट पर कारागार के सिपाही दीपक द्विवेदी व जगभान उसे जिला अस्पताल लेकर आए थे।
जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद मृतक के परिजनों को सूचना दी गई। घटना की सूचना पर छोटे भाई नकुल सिंह, मृतक की पत्नी सुधा व मां मुन्नी देवी रोते बिलखते जिला अस्पताल पहुंचे। यहां पुलिस पर आरोप लगाया कि अर्जुन की पिटाई की गई थी जिससे उसकी मौत हुई है।
बताया कि 15 जुलाई को एक पुराने केस मामले की तारीख पर वह बांदा अदालत पेशी पर गया था। जिसे लौटते समय रास्ते से पुलिस ने पकड़ लिया। पुलिसकर्मियों ने उसे मारापीटा है। छोटे भाई नकुल ने आरोप लगाया कि 16 जुलाई को जब वह अपने भाई से मिलने भरतकूप व कोतवाली आया था तो उसने बताया था कि पुलिस पिटाई कर रही है।
पिटाई के कारण ही भाई की मौत हो गई। गांव के पिंकू तिवारी के यहां फोन पर जानकारी दी कि भाई की तबियत खराब है। जब यहां आए तो पता चला मृत हो गया। मृतक के सिर व हाथ में चोट भी हैं।
जेल अधीक्षक अशोक सागर ने बताया कि बंदी अर्जुन सिंह की तबियत सोमवार को जब खराब होने की सूचना मिली तो जेल अस्पताल में डा. रामानुज व डा. आशीष ने उसका इलाज किया। हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल रेफर किया गया था। जेल अभिरक्षा में मौत होने के मामले में नियमानुसार मजिस्ट्रेटी जांच व मानवाधिकार आयोग को जांच के लिए पत्र लिखा गया है।
परिजन बोले-झूठ बोल रही पुलिस
भरतकूप के खमरिया गांव मप्र की सीमा से सटे स्थल पर लंबे समय से होने वाले जुआं को पकड़ने के लिए आईजी की गठित विशेष टीम ने छापा डाला था। जिसमें 16 जुलाई को पुलिस द्वारा बताया गया कि दस जुआरी पकड़े गये हैं और एक डाकू ठोकिया का भाई दीपक फरार हो गया है।
सोमवार को इन आरोपियों में एक अर्जुन की मौत के दौरान मौजूद उसके परिजनों ने दावा किया कि बीमार अर्जुन को 15 जुलाई को बांदा कचहरी से लौटते समय रास्ते में पुलिस ने दवा लेते जाते समय पकड़ा था। अब किसे सही माना जाए यह तो समझ में नहीं आ रहा है।