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प्रवासी मजदूरों को रोजगार दिलाने की कवायद तेज

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चित्रकूट। कृषि आधारित उद्यमिता प्रवासी मजदूरों को राह दिखाएगी। घर बैठे रोजगार मिलेगा। साथ ही उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। इसके लिए कृषि विशेषज्ञ कृषि आधारित उद्यम के व्यवहारिक व कारगर सुझाव मजदूरों को बताएंगे। ताकि आने वाले प्रवासी मजदूरों को यहीं पर रोजगार मिल जाए। बुंदेलखंड क्षेत्र जिलों से शहरों में काम करने वाले अधिकांश युवक पहले कृषि से जुडे़ थे, जो बेरोजगारी के कारण पलायन कर गए थे। कोरोना वॉयरस के कारण गैर प्रांतों से अपने घर लौट आए हैं। इन्हेें कृषि आधारित विभिन्न उद्योगों से जोड़ा जाएगा, जिससे उन्हें घर में ही रोजगार मिल जाए। इसके लिए कृषि विभाग और उससे जुड़ी संस्थाओं ने कार्य शुरू कर दिया है।
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कृषि आधारित उद्योग पुष्प उत्पादन, नर्सरी उत्पादन, वर्मी कंपोस्ट, बीज उत्पादन, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण ,जड़ी बूटी उत्पादन, गोबर से अगरबत्ती बनाना, मधु मख्खी पालन, डेयरी, मुर्गी पालन, बकरी पालन के साथ ही बागवानी आदि के कार्य से जोड़ा जाएगा।
उद्यान विभाग की योजनाओं में मिलने अनुदान फल-फूल एवं मसालों की खेती के लिए अधिकतम 40-से 50 प्रतिशत तक अनुदान, मसाला फसलों तैयार करने व सामग्री तैयार करने के लिए 12 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान, संरक्षित खेती करने के लिए आम, अमरूद, के पुराने बागों के जीर्णोद्वार, बागों की कटाई एवं छटाई के लिए 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर से हिसाब अनुदान मिलता है।
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पशु पालन विभाग की योजनाओं में गाय, भैंसों के लिए दुग्ध डेयरी, कु क्कुट पालन के लिए योजनाएं चल रही है। कु क्कुट पालन के लिए 30 हजार लेयर्स की योजना लागत की 180 लाख लाभार्थी, अंश 54 लाख बैंक लोन 126 लाख, बैक ब्याज दर 10 प्रतिशत ।
तीन प्रकार के रेशम का उत्पादन होता है। इसमें शहतूती रेशम, टसर रेशम, ऐरी रेशम का उत्पादन शामिल है। इसमें बुंदेलखंड के बांदा व चित्रकूट जिले में ऐरी रेशम का उत्पादन होता है। इसके उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए रेशम निदेशालय उत्तर प्रदेश एवं केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा सहायूतित सेक्टर, स्क ीम सिल्क सामग्री के तहत सहायता की जाती है। इसमेें प्रथम 10 दिनों तक चाकी कीटों की न्यूनतम 50 प्रति 100 डीएफ एल्स पर आपूर्ति है। कीट पालने के लिए उपकरण पर 90 प्रतिशत छूट के साथ 40 हजार तक का अनुदान मिलता है।
जिले में कृषि विभाग, उद्यान विभाग के साथ ही उत्तर प्रदेश राज्य जैव ऊर्जा विकास बोर्ड, दीनदायाल शोध संस्थान, तुलसी गनीवा कृषि फार्म व सद्गुरु चरण सेवा समिति शोभन आश्रम एेंचवारा कृषि आधारित उद्योग से प्रवासी श्रमिकों को जोड़ने का कार्य करेगी। इसके लिए जागरुकता अभियान शुरू कर दिया गया है।
उपकृषि निदेशक टीपी शाही, उद्यान विभाग के अधिकारी रमेश पाठक, तुलसी कृषि विभाग के गनीवा के डा चंद्रमणि त्रिपाठी व अखिल भारतीय सेवा संस्थान के निदेशक गोपाल भाई ने बताया कि कृषि आधारित फसलों के साथ ही कुटीर उद्योग व पशुपालन के माध्यम से प्रवासी मजदूरों को रोजगार दिलाने का कार्य किया जा रहा है।
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