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मध्य प्रदेश: मंदाकिनी का रौद्र रूप देख नदी किनारे उतरा राज परिवार, पूजा कर चढ़ाई चुनरी; फिर घटने लगा जलस्तर

Sun, 30 Aug 2026 10:39 AM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट

सार

Madhya Pradesh News: चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद राज परिवार के मुखिया हेमराज सिंह चतुर्वेदी और पूर्व विधायक नीलांशु चतुर्वेदी ने नदी तट पर पूजा-अर्चना की और चुनरी चढ़ाई। इसके बाद जलस्तर कम होने लगा, जिसे श्रद्धालु मां मंदाकिनी की कृपा मान रहे हैं।
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रौद्र मंदाकिनी को राज परिवार ने चढ़ाई चुनरी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चित्रकूट की धरती पर मां मंदाकिनी केवल एक नदी नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। यहां जब-जब मंदाकिनी ने रौद्र रूप धारण किया, तब-तब श्रद्धा और परंपरा के बीच एक ऐसी मान्यता सामने आई, जिसमें चित्रकूट का राज परिवार मां मंदाकिनी को मनाने के लिए उनके तट पर उतरता है।
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जलस्तर बढ़ा तो नदी किनारे पहुंचे राज परिवार के मुखिया
शनिवार को जब पतित पावनी मां मंदाकिनी का जलस्तर अचानक बढ़ा और नदी ने अपना रौद्र रूप दिखाया, तो चित्रकूट राज परिवार के मुखिया हेमराज सिंह चतुर्वेदी मां मंदाकिनी को मनाने के लिए पूजा-अर्चना करने पहुंचे। उनके साथ उनके पुत्र और चित्रकूट विधानसभा के पूर्व विधायक नीलांशु चतुर्वेदी भी मौजूद रहे।

विधि-विधान से पूजा, आरती के बाद चढ़ाई चुनरी
राज परिवार ने नदी के तट पर विधि-विधान से मां मंदाकिनी की पूजा की। आरती और प्रार्थना के साथ मां मंदाकिनी से अपना रौद्र रूप शांत करने की आरजू-मिन्नत की गई। इसके बाद मां मंदाकिनी को चुनरी अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि जब मां मंदाकिनी रुष्ट होकर अपना रौद्र स्वरूप दिखाती हैं, तो उन्हें मनाने के लिए राज परिवार की ओर से पूजा-अर्चना की जाती है और मां को चुनरी चढ़ाकर उनसे शांत होने की प्रार्थना की जाती है।
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सदियों पुरानी परंपरा में नदी से भावनात्मक रिश्ता
स्थानीय लोगों के बीच इस परंपरा को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि चित्रकूट और मां मंदाकिनी के बीच सदियों पुराने भावनात्मक रिश्ते के रूप में देखा जाता है। मान्यता और आस्था के इस दृश्य में ऐसा लगा मानो चित्रकूट अपने ही घर की मां को मनाने के लिए उनके द्वार पर खड़ा हो।

पूजा के बाद घटने लगा जलस्तर, श्रद्धालुओं ने माना आशीर्वाद
पूजा-अर्चना और चुनरी अर्पित करने के बाद कुछ ही समय में मंदाकिनी का जलस्तर कम होना शुरू हो गया। इसे श्रद्धालु मां मंदाकिनी का आशीर्वाद और उनकी कृपा मान रहे हैं। हालांकि नदी के जलस्तर में बदलाव प्राकृतिक परिस्थितियों से भी जुड़ा होता है, लेकिन चित्रकूट की धार्मिक चेतना में इस घटना को आस्था की दृष्टि से देखा जा रहा है।

नदी नहीं, मां का स्वरूप मानने की परंपरा
मंदाकिनी के तट पर राज परिवार की यह तस्वीर चित्रकूट की उस परंपरा को जीवंत करती है, जहां नदी को सिर्फ जलधारा नहीं, बल्कि मां का स्वरूप माना जाता है। यही विश्वास है कि मां नाराज हों तो उन्हें मनाया भी जा सकता है- प्रार्थना, श्रद्धा और समर्पण के साथ।
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