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Chitrakoot News: बिजली चोरी के आरोपी भोला निषाद को मिली जमानत

Tue, 28 Apr 2026 11:28 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
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चित्रकूट। अपर सत्र न्यायाधीश राममणि पाठक ने बिजली चोरी के आरोप में न्यायिक हिरासत में चल रहे भोला निषाद को जमानत दे दी है। अदालत ने 25 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक प्रतिभूति दाखिल करने पर उसे रिहा करने का आदेश दिया।
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सरधुवा थाना क्षेत्र के गरीबदास का पुरवा निवासी भोला निषाद के यहां 8 सितंबर 2022 को प्रवर्तन दल के अवर अभियंता सौरभ कुमार अग्रहरि ने छापेमारी की थी। जांच में उन पर मीटर बाईपास कर सीधे एलटी लाइन से दो किलोवाट बिजली चोरी का आरोप लगा था। अदालत में अधिवक्ता ने आरोपी को निर्दोष बताते हुए झूठा आरोप होने की बताई। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।



भोला निषाद ने शमन शुल्क और बकाया बिजली बिलों का भुगतान भी कर दिया है। अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का विरोध किया। अपर सत्र न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। तथ्यों को देखते हुए अदालत ने भोला निषाद को जमानत पर रिहा करने का पर्याप्त आधार पाया।
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एनडीपीएस मामले में रिंकू निषाद को जमानत मिली

चित्रकूट। विशेष न्यायालय एनडीपीएस एक्ट के न्यायाधीश राहुल मिश्रा ने आरोपी रिंकू निषाद को जमानत दे दी है। अदालत ने 60 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत पर रिहाई का आदेश दिया।


कर्वी कोतवाली के अमानपुर मजरा बहादुर निवासी रिंकू निषाद पर एनडीपीएस एक्ट के तहत थाने में प्राथमिकी दर्ज है। वह 21 अप्रैल से जिला कारागार में बंद था। अदालत ने 31 जनवरी को उसकी अनुपस्थिति के कारण गैर-जमानती वारंट जारी किया था। पुलिस ने वारंटी को 21 अप्रैल को अदालत में पेश किया था। निषाद ने अपनी पेशी की तारीख की जानकारी न होने का तर्क दिया था और कहा था कि उसने यह गलती जानबूझकर नहीं की।



चेक बाउंस के मामले में विनीत सिंह को मिली जमानत

चित्रकूट। सिविल जज सीनियर डिवीजन के न्यायाधीश सचिन कुमार दीक्षित ने चेक बाउंस के मामले में आरोपी विनीत सिंह की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। अदालत ने उसे 20 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहा करने का आदेश दिया।
मामला वर्ष 2025 में पहाड़ी थाना में 138 एनआई एक्ट में दर्ज किया गया था। इस मामले में आरोपी विनीत सिंह के अधिवक्ता की ओर से अदालत में जमानत अर्जी डाली गई थी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायालय में उपस्थित होकर उसने खुद को निर्दोष बताया। आरोप लगाया कि उसे झूठा फंसाने के लिए फर्जी चेक दाखिल किया गया है। अदालत ने पत्रावली का अवलोकन में पाया कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में जमानत का आधार पर्याप्त है। यह अपराध सात वर्ष से कम के कारावास से दंडनीय है। ऐसे में सिविल जज ने उसे जमानत देने का आदेश जारी किया। (संवाद)
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