एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेश के तहत तीर्थक्षेत्र में मंदाकिनी
नदी के प्रवाह में अवरोधक माने गए निर्माणों को ध्वस्त करने का क्रम जारी
है। सोमवार से एक बहुचर्चित पुल को तोड़ने का काम शुरू हुआ जो मंगलवार को
भी जारी रहा। अधिकारियों ने खुद माना कि यह बहुत मजबूत पुल बना है और इसे
तोड़ने में मशक्कत करनी पड़ रही है।
गौरतलब है कि मंदाकिनी नदी के
प्रवाह में अवरोध करने वाले तीर्थक्षेत्र में कुल 18 स्थान चिह्नित किए गए
हैं। चित्रकूट (मप्र) क्षेत्र के एसडीएम दीपक वैद ने बताया कि नेशनल ग्रीन
ट्रिब्यूनल की भोपाल बेंच ने मंदाकिनी नदी के संरक्षण को सुरक्षा को लेकर
इन अवरोधों को ढहाने के आदेश दिए थे। उन्होंने बताया कि इसके विरोध में
दायर याचिकाओं को भी बेंच ने खारिज कर दिया था और कुछ लोगों पर जुर्माना भी
लगाया था।
एसडीएम ने बताया कि इसके बाद से कई लोगों ने अपने निर्माणों को
स्वत: ढहाया भी है। उधर, इसी क्रम में मंगलवार से सिरसा वन (मप्र) के पीछे
बने एक निजी पुल (रपटे) को ढहाने का काम बीती शाम से शुरू किया गया।
चित्रकूट (मप्र) के सीएमओ (चीफ म्युनिसिपल आफीसर) अमर सिंह परिहार ने बताया
कि अभी तक 14 अवरोधों को ढहा दिया गया है।
बताया कि इस संबंध में अभी तक
की कार्रवाई रिपोर्ट देने के लिए चित्रकूट यूपी के अधिकारियों के सहित उन
लोगों को कोर्ट के सामने पेश होना है।सीएमओ ने बताया कि फिलहाल 14 निर्माण
ध्वस्त किए जा चुके हैं, जो बाकी हैं उनमें एक जगद्गुरु रामभद्राचार्य के
एक भवन से संबंधित है, जिसमें उन्होंने दो दिन का समय मांगा है।