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40 की उम्र में 50 से अधिक बच्चों को बनाया हवस का शिकार

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चित्रकूट। 40 से भी कम उम्र में 50 से अधिक बच्चों और किशोरियों को अपनी हवस का शिकार बनाने वाले सिंचाई विभाग के अवर अभियंता रामभवन के गुनाहों का इतिहास एक दशक से भी ज्यादा पुराना है। पर्दाफाश होने का सिलसिला वर्ष 2012 में किशोरी की खुदकुशी से शुरू हुआ था, लेकिन सिंचाई विभाग की कमाई पानी की तरह बहाकर अवर अभियंता ने अपने को बचा लिया। न पुलिस ने सुनी और न ही समाज के किसी मठाधीश ने। उधर, सीबीआई दिल्ली की टीम जेई को लेकर चित्रकूट जांच करने के लिए पहुंची।
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मंगलवार को सीबीआई द्वारा दिल्ली की कोर्ट में पेश किए गए आरोपी जेई की गिरफ्तारी सीबीआई ने यहां दो नवंबर को की थी। एक सहायक अभियंता को भी हिरासत में लिया था। यह खबर तीन नवंबर के अमर उजाला के प्रथम पेज पर छपी थी। सीबीआई ने दोनों से यहां रेस्ट हाउस में लंबी पूछताछ की थी।
अपनी पत्नी और बच्चों को गुमराह कर जेई ने कई बच्चों और किशोरियों के साथ न सिर्फ घिनौना खेल खेला, बल्कि उनके वीडियो बना उन्हें इंटरनेशनल पोर्न साइड में अपलोड करके करोड़ों रुपये कमाए। जेई अपनी तकनीकी योग्यता का पूरा इस्तेमाल करते हुए सारा काम इतने शातिर दिमाग से करता रहा कि काफी दिनों तक उसके इस गुनाह की भनक किसी को नहीं लगी।
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यही वजह है कि शोषण के शिकार हुए बच्चों का आंकड़ा आधा सैकड़ा पार कर गया है। सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने जेई के कब्जे से करीब आठ लाख रुपये, 12 मोबाइल फोन, लैपटॉप, वेब कैमरे, इलेक्ट्रानिक स्टोरेज डिवाइस और पेन ड्राइव बरामद कीं। अभियंता का परिवार इस हरकत से अंजान है। सीबीआई टीम ने जेई रामभवन के चालक अभय कुमार को भी हिरासत में लेकर दो-तीन दिन तक लंबी पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया था। जेई को अपने साथ प्रयागराज ले गई थी। मूल रूप से बांदा जिले के नरैनी निवासी जेई रामभवन बुंदेलखंड के कई जिलों में विभागीय कार्य देखता रहा है। सूत्र बताते हैं कि प्रयागराज में इसका अक्सर आना जाना था। वहीं किसी साइबर विशेषज्ञ की मदद से इसका रैकेट चलता था।
दो को पकड़ा, आज अदालत में किया पेश : दिल्ली की सीबीआई टीम का अभियान बेहद गुप्त रहा। टीम दो नवंबर को मुख्यालय आकर जेई रामभवन का पता लगाने के पहले सिंचाई विभाग कार्यालय और वहीं पर स्थित आवासीय कालोनी पहुंची थी। वहां पर जेई के न मिलने पर उसके किराये के घर एसडीएम कालोनी पहुंची। यहां उसे विभाग के एई के साथ पकड़ लिया। उसका मोबाइल लैपटाप, दो दर्जन पेनड्राइव, चिप, कैमरे अन्य सामग्री को अपने कब्जे में ले लिया था। चार नवंबर को सीबीआई टीम उसे लेकर यहां से चली गई थी।
दस साल से चित्रकूट में है तैनात : जेई रामभवन 10 साल से चित्रकूट में तैनात है। हमीरपुर से ट्रांसफर होकर आने पर यहां सिंचाई विभाग कार्यालय के सामने कपसेठी गांव में किराये के घर में रहता था। कुछ साल बाद उसका परिवार भी यहीं आ गया था। कर्मचारी बताते हैं कि कभी विभागीय कालोनी में नहीं रहता था। वर्ष 2012 में किशोरी की खुदकुशी में इसका नाम आने के बाद से वह घर बदलकर एसडीएम कालोनी में रहने लगा। बताया गया कि अक्सर वह अपनी पत्नी व बच्चों को गांव भेज देता था। यहां अकेले ही रहना पसंद करता था।
जेई की करतूतों से जिले के निवासी हैरान : जेई रामभवन क े पकडे़ जाने के बाद जब उसकी करतूतें खुली तो जिलेवासी हैरान रह गए। वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भी घटना को लेकर चुप्पी साधे हैं। सिंचाई विभाग में कार्यरत होने से जेई का ग्रामीण क्षेत्रों में आना जाना होता था। महोबा के अर्जुनपुर बांध का भी इसके पास चार्ज था, जिससे इसका अक्सर वहां भी आना जाना होता था। शहर व गांव से दूर एकांत में बने विभाग के रेस्ट हाउस में रात को नहर व पंप कैनाल ठीक करने के बहाने रहता भी था। जहां ये घिनौना खेल चलता रहा। गरीबी के चलते लोग जुबान तक नहीं खोल पाए। नवंबर के प्रथम सप्ताह में सिंचाई विभाग मेें कार्यरत जेई को सीबीआई पकड़ ले गई थी। अमर उजाला ने प्रमुखता से खबर छापी थी।
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