उद्यमिता विद्यापीठ में कथा सुनाते चिन्मयानंद बापू।
- फोटो : अमर उजाला
द्यमिता विद्यापीठ प्रांगण में चल रही राम कथा के दूसरे दिन चिन्मयानन्द बापू ने रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसी दास को समाज का सबसे बड़ा हितैषी बताया। तुलसी की राम चरित मानस कोरी कल्पना न होकर जीवन जीने का संविधान है। ‘मधुर मधुर नाम सीता राम सीता राम’ संकीर्तन से पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया। अयोध्या से पधारे महामंडलेश्वर दामोदर दास सहित संत महात्मा भी कथा स्थल पर मौजूद रहे।
कथावक्ता ने कहा कि भरत चरित्र सुनने से समस्त उत्पातों का समन होता है। भरत का चरित्र जप यज्ञ है। जब यह यज्ञ किसी पावन तीर्थ में किया जाता है तो उसका फल कई गुना बढ़ जाता है। चित्रकूट तो वह तीर्थ है जहाँ प्रवाहमान मन्दाकिनी ने कभी श्री राम का पाद प्रच्छालन किया था।
कामदगिरी जहां प्रभु निवास करते थे और हनुमान धारा जैसा स्थल है जहां स्नान करने से सिर्फ तन मन के ताप ही नहीं दूर होते बल्कि मानसिक विकारों को भी शांति मिलती है। दुनिया को प्रसन्न करने से अच्छा है परमात्मा को प्रसन्न कर लिया जाय तो पूरी दुनिया तुम्हारे पीछे चलेगी। बापू ने बताया कि अगर किसी काम में असफलता मिले तो चिंतित होने की बजाय उसे हरि इच्छा मान स्वीकार कर लेना चाहिए।