अपना दल की जिला इकाई में फूट के आसार बढ़ते जा रहे हैं। गत दिनों अपना दल के एक धड़े द्वारा किए गए प्रदर्शन के संदर्भ में पार्टीजनों द्वारा दिए गए अलग-अलग तर्कों से ये संकेत मिल रहे हैं। स्थिति ऐसी लग रही है कि जिलाध्यक्ष एक तरफ और मंडल अध्यक्ष एक तरफ।
भाजपा के साथ गठबंधन कर पार्टी के जिन दो सांसदों ने लोकसभा पहुंचने का सौभाग्य पाया, उनमें एक पार्टी संस्थापक अध्यक्ष डा. सोनेलाल पटेल की पुत्री अनुप्रिया पटेल हैं। अनुप्रिया जिले के हनुमानगंज में एक परिवार की बहू भी हैं और इस नाते यहां अपना दल का भी अस्तित्व है।
चुनाव के बाद जब अपना दल के नेताओं को लोकसभा में प्रतिनिधित्व का अवसर मिला तो जिले के नेताओं की खुशी देखते ही बनती थी। शुरुआत में जनसमस्याओं के समाधान को कार्यक्रम भी किए गए। लेकिन धीरे-धीरे जिले में दल में अंतर्कलह पनपने लगी। पार्टी के किसी बड़े नेता का लंबे समय से यहां न आना भी इसका बड़ा कारण है।
अपना दल में बीते दिन कलह खुलकर सामने तब आई जब 16 जनवरी को दल ने जिले की जनसमस्याओं को लेकर प्रदर्शन करने और बाद में गठबंधन सांसद भैरो प्रसाद मिश्र (भाजपा) को ज्ञापन देने का कार्यक्रम बनाया। जिलाध्यक्ष कोदूराम पटेल ने विज्ञप्ति जारी कर घोषित किया कि ये पार्टी कार्यक्रम नहीं है और इस तरह की गतिविधियां करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
जबकि प्रदर्शन की अगुवाई करने वाले पार्टी के बुंदेलखंड मंडल अध्यक्ष यशवंत सिंह का कहना था कि प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष से अनुमति ली गई है। संतोष धुरिया और पार्टी के कुछ अन्य नेताओं ने तो यहां तक दावा किया कि पार्टी के अधिकृत जिलाध्यक्ष मोहनलाल फौजी हैं, कोदूराम को तो उनकी व्यस्तता की वजह से कार्यवाहक जिम्मेदारी दी गई थी।
वहीं कोदूराम पूर्णकालिक जिलाध्यक्ष होने का दावा करते हैं। उनका कहना है कि उनके पास इसके प्रमाण हैं। अब हाल ही में जारी एक अन्य विज्ञप्ति में कहा गया है कि जल्द पुराने कार्यकर्ताओं की घर वापसी होगी और संगठन में भारी फेरबदल किया जाएगा। इससे अपना दल की जिला इकाई में घमासान छिड़ने के आसार हैं। वहीं मंडल मीडिया प्रभारी संतोष कुमार धुरिया ने बताया कि कई बार पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल, सांसद अनुप्रिया पटेल से यहां आने का अनुरोध किया पर कार्यक्रम नहीं बन सका।