चित्रकूट। 43.13 करोड़ के घोटाला की जांच के लिए अपराध अनुसंधान संगठन लखनऊ को लिखे पत्र का कोई जवाब नहीं आया है। ऐसे में फिलहाल जिले की एसआईटी ही जांच को आगे बढ़ा रही है। शुक्रवार रात दो बजे तक कोषागार के अधिकारियों व अकाउंटेंट को आमने सामने बैठाकर भुगतान की फाइलों व ऑनलाइन रिकॉर्ड चेक किया। इस दौरान तीनों अकाउंटेंट ने कई बार अपने हस्ताक्षर न होने का दावा किया, लेकिन वरिष्ठ कोषाधिकारी ने उनकी फाइल और आईडी से मिलान कर दिखाया तो उन्होंने भुगतान करना स्वीकार भी किया। तीनों अकाउंटेंट संदेह के घेरे में फिर आए तो जांच टीम ने उन्हें जिले से बाहर जाने पर रोक लगा दी है।
जिले में कोषागार विभाग के घोटाले की विभागीय जांच होने के बाद जिला पुलिस ने इसकी अपराध अनुसंधान संगठन लखनऊ से जांच कराने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा। दस दिन बाद भी फिलहाल कोई जवाब नहीं आया है। इसी बीच कोषागार विभाग के निदेशक वीके सिंह ने आर्थिक अपराध शाखा (ईओ डब्ल्यू) व साइबर विशेषज्ञों से जांच कराने की बात कही है। अभी जिले में इस जांच को लेकर कोई हलचल नहीं है। खुद वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने बताया कि उनके पास अभी कोई आदेश नहीं आया है। विभागीय जांच पहले भी हुई है और उच्चाधिकारी अन्य जांच समय समय पर कराते ही रहेंगे ताकि दोषियों को सजा मिल सके। हर जांच में विभागीय अधिकारी कर्मचारी सहयोग कर रहा है।
इधर पूरे मामले की शनिवार को जांच जारी रही। आरोपी पेंशनर, बिचौलिए व विभागीय अधिकारियों से मांगी गई संपत्ति का पूरा विवरण किसी ने नहीं दिया है। इसके लिए इन सभी को फिर से रिमाइंडर नोटिस तैयार की गई। जिसे सोमवार को भेजा जाएगा। कोषागार विभाग में एसआईटी टीम ने शुक्रवार की रात दो बजे तक पूछताछ व रिकार्ड का मिलान किया। सबसे खास बात यह रही कि संदेह के घेरे में तीन अकाउंटेंट राजबहादुर, योगेंद्र सिंह व राजेश कुमार को वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह के सामने विभाग के एप व किए गए भुगतान का रिकार्ड लेकर आमने सामने बैठाया गया। इस दौरान तीनों अकाउंटेंट ने 12 ऐसे खाते बताए जिसमें कहा कि उनके हस्ताक्षर ही नहीं हैं। उन्होंने इसका भुगतान नहीं किया है। इन 12 खाते में लगभग दस करोड़ रुपये हैं।
तीनों अकाउंटेंट ने जब अपने हस्ताक्षर न होने की बात कही और यह भी दावा किया कि उनकी आईडी का पासवर्ड चोरी कर विभागीय अधिकारियों ने भुगतान किया होगा। इसे लेकर एसआईटी ने वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह को भी कठघरे में खड़ा किया। दो घंटे में उन्होंनें सन 2021 से लेकर 2023 तक के सभी अकाउंटेंट के डिजीटल हस्ताक्षर व उनकी आईडी के साथ सीसीटीवी फुटेज के साथ सामने रखे। इसके बाद डरे सहमे अकाउंटेंट ने स्वीकार कर लिया कि उनके हस्ताक्षर तो हैं और अपनी आईडी विभाग के नामजद एटीओ व अकाउंटेंट को दे रखी थी। इस घोटाले में अपना हिस्सा होने से बार बार इंकार किया लेकिन एसआईटी ने तीनों को संदेह के दायरे में रखा है। तीनों को जिला छोड़कर न जाने के निर्देश दिए हैं। जरुरी काम से जाने के पहले विभाग व जांच टीम को आने जाने की सूचना देने के भी निर्देश हैं।
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एटीओ ने जमानत याचिका दाखिल की
चित्रकूट। कोषागार घोटाला मामले में जेल में बंद एटीओ विकास सचान ने जिला जज कोर्ट में शनिवार को जमानत की याचिका डाली है। जिला शासकीय अधिवक्ता श्यामसुंदर मिश्रा ने बताया कि याचिका पर कोर्ट ने सुनवाई नहीं की है। छह दिसंबर सुनवाई की तारीख दी गई है। इसके अलावा अन्य पेंशनर व बिचौलियों की जमानत पर भी सुनवाई तीन दिसंबर के बाद करने का कोर्ट ने आदेश दिया है। संवाद
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चित्रकूट। पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि 43.13 करोड़ के घोटाला मामले में जांच जारी है। इसकी ईओडब्ल्यू व साइबर एक्सपर्ट के अलावा अपराध अनुसंधान संगठन लखनऊ से भी जांच के लिए पहले पत्र लिखा जा चुका है। दस बारह दिन होने के बाद फिलहाल अभी हाईकमान से कोई नया आदेश नहीं मिला है। एक माह से चल रही जांच लगभग पूरी होने वाली है। रिकवरी भी नहीं हो रही है। ऐसे में जल्द ही पुलिस कुछ और कार्रवाई करेगी। फाइलों व खातों का मिलान हो चुका है। इसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी। किसी भी नामजद पेंशनर, बिचौलिया या विभागीय अधिकारी कर्मचारी को छोड़ा नहीं जाएगा। (संवाद)