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Chitrakoot News: दिवंगत पिता और खुद के खाते में अजय लेता रहा पेंशन

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चित्रकूट। कोषागार में हुए 43.13 करोड़ रुपये के पेंशन घोटाले में भौंरी के अजय पांडेय ने अपने पेंशनर पिता की मृत्यु के बाद भी उनके खाते में लाखों रुपये लिए। साथ ही विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों के गठजोड़ से अपने अलग खाते में भी लाखों रुपये मंगवाए। 18 बार में दोनों खाते से 70 लाख रुपये निकाले। जांच में पाया कि दो बार जब पिता की और उसके खाते में पेंशन की नहीं आई तो उसने बेझिझक कार्यालय जाकर कुछ एटीओ व कर्मचारियों से मिलकर इसे फिर से संचालित कराया। अब जेल जाने के भय से अग्रिम जमानत के लिए अदालत से गुहार भी लगा रहा है।
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भौंरी के अजय पांडेय के पिता अंबिका प्रसाद पांडेय पेंशनर थे। इनका निधन 10 जून 2019 को हो गया था, पर उनका पेंशन खाता बंद नहीं हुआ। मृत प्रमाण पत्र इनके खाते में न लगाकर बेटा अजय पेंशन मंगाता रहा। करीब दो साल तक पेंशन की रकम लेने का दौर जारी रहा तो उसका हौसला बढ़ा और विभागीय अधिकारियों से सांठगांठ से पंजाब नेशनल बैंक में अपने खाते में भी यही धनराशि मंगाने लगा। इससे एक ही व्यक्ति की पेंशन दो अलग अलग खाते में जाने लगी और किसी को भनक तक नहीं लगी। अजय के खाते में 33 लाख 26 हजार 628 रुपये और उसके दिवंगत पिता के खाते में 37 लाख 70 हजार 233 रुपये मिले हैं। जिला शासकीय अधिवक्ता श्यामसुंदर मिश्रा ने बताया कि मामले का भंडाफोड़ होने के बाद अजय की भी पोल पट्टी एसआईटी ने खोल दी। जेल जाने के भय से उसने अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका डाली थी। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई कर जिला जज ने मामले को संगीन बताते हुए याचिका खारिज कर दी है।
कचहरी परिसर में ही मिले आरोपी बिचौलिए अजय ने बेखौफ होकर बताया कि उसका कोषागार विभाग के दो एटीओ व दो अकाउंटेंट से संपर्क था। पिता के निधन के बाद जब वह कोषागार कार्यालय मृत प्रमाण पत्र लेकर पहुंचा था तो इन्हीं अधिकारियों ने बाद में आने के लिए कहा। बाद में उससे संपर्क कर पूरी योजना बताई। इसके एवज में वह 60 प्रतिशत रकम इन्हीं अधिकारियों व कर्मचारियों को खुद बैंक से निकालकर देता था। 40 फीसद ही उसे मिलता था। जानकारी के अनुसार अजय के खाते में जब दो माह की पेंशन नहीं पहुंची थी तो वह कार्यालय जाकर इन्हीं अधिकारियों से मिला। इसके बाद तय हुआ कि उसे सिर्फ 20 फीसद ही लेना हो तो बताओ नहीं तो खाता बंद हो जाएगा। लालच में उसने हां कहा तो फिर से उसकी और पिता के खाते में पेंशन आने लगी। जानकारी के अनुसार यह एटीओ व अकाउंटेंट में अवधेश सिंह, संदीप, विकास सचान व अशोक वर्मा हैं, जो जेल में हैं। इसमें संदीप की विवेचना के दौरान मृत्यु हो चुकी है। अवधेश सिंह अग्रिम जमानत की स्टे पर हैं।
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नहीं मिला सही जवाब व गायब मिले कुछ कागजात
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। कोषागार में हुए करोड़ों के फर्जी भुगतान की जांच में मंगलवार को विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों से मिले जवाब से एसआईटी संतुष्ट नजर नहीं आई। पाया गया कि जो अनियमित भुगतान हुए हैं, उनका ज्यादातर रिकार्ड गायब किया गया है। जांच टीम के अनुसार कई पेंशनरों के खाते में भेजे गए करोड़ों रुपये के भुगतान के कागजात नहीं मिले। पेंशनर के एरियर भु्गतान, ब्याज समायोजन का फार्म नंबर चार नहीं मिले हैं। जांच टीम का मानना है कि विभाग से ही कागजात व रिकार्ड न मिलने का अर्थ यही है कि विभागीय कर्मचारियों ने इसे जानबूझकर छिपाया है। यह सब साजिशन ही भुगतान किए गए हैं। जांच टीम ने विभाग के कर्मचारियों से चार घंटे तक पूछताछ की।
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