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मृतक को जिंदा दिखाकर करोड़ों की जमीन बेचने के मामले में प्रशासन गंभीर, कई बिंदुओं पर जांच शुरु

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मानिकपुर(चित्रकूट)। मृतक को जिंदा दिखा व उसका फर्जी पहचानपत्र बनवाकर करोड़ों रुपये की भूमि बेचने के मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। इस मामले की कई स्तर पर जांच शुरू हो चुकी है। भूमि के फर्जी कागजात तैयार कर बेचनामा बनवाने, रजिस्ट्री व स्टांप चोरी के मामले की जांच एआईजी स्टांप ने भी शुरू करा दी है। यह जांच उपनिबधंक रजिस्टार विभाग कर रहे हैं। जिसमें इन्हीं बिंदुओं पर जांच की जा रही है।
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मामला मानिकपुर के सरहट से सटे झरी के पुरवा का है। स्थानीय भोलवा प्रसाद पुत्र दुगना की 25 साल पहले कटनी मप्र में जाने के बाद मौत होनेे की पुष्टि हुई है। सकी गांव के पुरवा झरी में 1. 925 हेक्टेयर भूमि बंजर पड़ी है। कुछ लोगों को इसकी जानकारी होने पर भूमि हड़पने के लिए साजिश रचनी शुरू किये। आरोप लगा कि साजिशन 25 अगस्त 2018 को उसकी मौत की जानकारी देकर कुछ लोगों ने तहसील से उसकी बहन के पुत्र नानकुनी पुत्र बोग्गा के नाम वारिस नामा बनवा लिया। फिर भूमि बेचने का प्रयास किया गया। जिसकी जानकारी होने पर स्थानीय लोगों ने आपत्ति दाखिल की। जिस पर 23 दिसंबर 2018 को जांच के बाद नायब तहसीलदार कार्यालय से वसीयतनामा कैंसिल कर दिया गया। कुछ लोगों ने मृतक भोलवा को जिंदा बताकर उसका फर्जी आईडी कार्ड बनवाया और 11 सिंतंबर 2019 को उसकी लाखों रुपये की पूरी भूमि बेच दी है। जिस पर एक शिक्षक व मानिकपुर के एक निवासी के गवाह के हस्ताक्षर भी हैं। इस भूमि की रजिस्ट्री व स्टांप शुल्क की चोरी की जानकारी होने पर मामले में आपत्ति दाखिल की गई है।
दाखिल खारिज पर रोक लगाई जा चुकी है। अब मृतक फिर जिंदा होने का प्रमाण पत्र जारी करने की जांच हो रही है। इसी बीच एआईजी स्टांप उमेश कुमार गुप्ता ने फर्जी कागजात तैयार कर बेचनामा बनाने, रजिस्ट्री कराने व स्टांप मामले की जांच के लिए रजिस्टार विभाग के उपनिबंधक अभिलाष मिश्रा को जांच सौंपी है। सोमवार को रजिस्टार मिश्रा ने बताया कि मामले की कई बिंदुओं पर जांच शुरू हो चुकी है। जल्द ही पूरी रिपोर्ट एआईजी स्टांप को देंगे।
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