सभी जिलों में सिटीजन चार्टर के 14 बिंदुओं का कड़ाई से अनुपालन कराया जाएगा। इसमें लापरवाही पर संबंधित थानाध्यक्ष या विवेचक पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हर दो महीने में इन मामलों की समीक्षा भी की जाएगी। जिले में सिटीजन चार्टर की समीक्षा करने लखनऊ से एडीजी (मानवाधिकार) विश्वजीत महापात्रा ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि जनहित गारंटी अधिनियम के तहत बनाए गए सिटीजन चार्टर (नागरिक अधिकार पत्र) के तहत 14 मामलों की समीक्षा करने के लिए शासन स्तर पर एडीजी की तैनाती की गई है।
यह देखा जाएगा कि इन 14 मामलों को निर्धारित समय के अंदर निस्तारित किया गया है या नहीं। महापात्रा ने बताया कि वह हर दो महीने में यहां आकर इन कार्यों की समीक्षा करेंगे।
2014 में इन कामों में जरूर शिथिलता बरती गई थी पर 2015 में स्थिति में सुधार आया है। हर जिले में इसका नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। चित्रकूट में सीओ सत्यवीर सिंह को यह जिम्मेदारी दी गई है।
इस बारे में सीओ सत्यवीर ने बताया कि पासपोर्ट के 11 और शस्त्र लाइसेंस संबंधी लगभग दो सौ मामले लंबित हैं। 2007
से अब तक गुमशुदगी के पंजीकृत 29 मामलों में से पांच बच्चों का पता लगाया जा चुका है। एएसपी ने बताया कि हर 15 दिन में जांच अधिकारी को बुलाकर इन मामलों की प्रगति पता की जाती है।
जिले में इसके लिए मानीटरिंग अथारिटी एएसपी आरडी चौरसिया हैं।
उन्होंने बताया कि अप्राकृतिक मौत, गुमशुदगी की सूचना, गुमशुदा की तलाश संबंधी मामला तत्काल दर्ज कर छानबीन करने, शस्त्र लाइसेंस संबंधी मामला बीस दिन में, पासपोर्ट सात दिन, चरित्र सत्यापन सात दिन, पुलिस संबंधी मामले में चरित्र सत्यापन पांच दिन, पटाखों से सबंधित लाइसेंस दस दिन के अंदर करने के निर्देश सिटीजन चार्टर में हैं।