मौरंग की बजाए क्रेशर डस्ट का कर रहे इस्तेमाल
चित्रकूट। अवैध खदानों पर पड़े छापों के बाद मौरंग के दामों में भारी उछाल आया है। ईंटा मंडी इलाहाबाद रोड कर्वी में मौरंग की आवक काफी कम होने से इसके दाम बीते दो माह में बढ़कर डेढ़ गुना हो गए हैं। दुकानदारों का कहना है कि व्यवसाय में सामान नदारद होने से धंधा ठप होने की कगार पर आ गया है। ग्राहक चुनाई के लिए मौरंग की बजाए क्रेशर से निकली डस्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं।
बीते दिनों जिलाधिकारी डा. आदर्श सिंह के अवैध खनन को लेकर कड़े तेवरों के मद्देनजर ताबड़तोड़ छापों ने जहां राजस्व बचाया वहीं पर्यावरण को काफी राहत दी है। हालांकि अवैध खनन में काफी हद तक लगी लगाम से बिल्डिंग मैटेरियल के दामों में भारी बढ़ोत्तरी हो गई है। ईंटा मंडी में बिल्डिंग मैटेरियल के सप्लायर शीलू केसरवानी ने बताया कि रोज सुबह ग्राहक मौरंग के लिए आते है, लेकिन उपलब्धता कम होने से दाम सुनकर खाली हाथ लौट जाते हैं। यदि कभी एक दो ट्रक वाले मौरंग लेकर पहुंच जाते हैं वह अनाप-शनाप रेट मांगते है। दुकानदारों का कहना है कि तीन दिन पहले जो मौरंग की ढाई सौ फीट की गाड़ी 7500 तक बिक रही थी वहीं सोमवार और मंगलवार को ट्रक वाले उतनी ही मौरंग का 13000 रुपए मांग रहे थे। उसके बाद भी उनके यहां ग्राहकों की भीड़ जुटी हुई थी।
शिवहरे इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर अजय कुमार शिवहरे ने बताया जहां मार्च माह में सौ फीट मौरंग का भाव 1800 से 2000 रुपए था वहीं मई के महीने में यह बढ़ कर 2500 से 3000 रुपए के बीच हो गया है। दुकानदारों का मानना है कि इसके अलावा बांदा जिले में चले ओवरलोडिंग की धरपकड़ के बाद गिट्टी का भी रेट काफी बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि मार्च के महीने में गिट्टी का भाव 3200 रुपए प्रति सौ फुट रहा वहीं इस समय 4500 रुपए के लगभग बिक रहा है। वहीं गिट्टी बालू के दुकानदार रमाशंकर ने बताया कि मौरंग तो यहां मिल ही नहीं रही है। कहा कि दामों में तेजी की वजह से लोग मौरंग के बदले क्रशर डस्ट से काम चला रहे हैं। हालांकि दुकानदारों ने कतराई और लगन का दिन बीत जाने पर बिल्डिंग मैटेरियल की बिक्री बढ़ने की संभावना जताई है। उनकी दुकान से क्रेशर डस्ट खरीद रहे मडै़यन निवासी रामहित ने बताया कि दाम एकाएक बढ़ जाने से चुनाई के लिए मौरंग के बजाए क्रेशर डस्ट खरीद रहे हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
खनिज अधिकारी शैलेंद्र सिंह का कहना है कि किसी भी वस्तु का उत्पादन कम होने पर उसका दाम बढ़ना तो स्वाभाविक है लेकिन अवैध खनन में जारी अनियमितताओं की वजह से लोगों को हो रही दुश्वारियों के कारण इसका रोकना भी जरूरी था और सबसे बड़ी बात तो यह कि पर्यावरण को इससे लाभ होगा। उन्होेंने बताया कि जिले में ग्रेनाइट और बालू के कुल मिलाकर लगभग डेढ़ सौ ठेकेदारों के पट्टे हैं।