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फोटोग्राफ और कलाकृतियों में दिखीं भविष्य की संभावनाएं

Thu, 14 Feb 2013 05:31 AM IST
Chitrakoot
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चित्रकूट। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में चल रही तीन दिवसीय मूर्ति और छायाचित्र प्रदर्शनी में युवा प्रतिभाओं की कल्पनाओं के कई रंग देखने को मिल रहे हैं। कहीं शहर के खूबसूरत नजारे हैं तो कहीं भारतीय परंपराओं की सोच। कहीं वेस्ट मैटेरियल का उपयोग कर बनाई गई कलाकृति हैं तो कहीं फोटोग्राफी के विभिन्न आयाम हैं। तिराकोटा कलाकारों ने भी कुछ कम मेहनत नहीं की। मेटल और लकड़ी से बनाई गई मूर्तियों में भारतीय सोच की एक अलग ही झलक देखने को मिली। प्रदर्शनी को देखने वाले कलाओं की प्रशंसा किए बिना नहीं रह सके। कुछ उदीयमान और संभावनाशील कलाकारों से हमने बात की...
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इनसेट -------------------
गरीब बच्चों की दशा सामने लाने की कोशिश
आजमगढ़ निवासी श्रवण कुमार यादव फोटोग्राफी के माध्यम से सबसे ज्यादा गरीब बच्चों की दशा को दिखाने का प्रयास करते हैं। वह मानते हैं ऐसे गरीब बच्चे किस तरह अपना बचपन खो देते हैं। बेहाल, शिक्षा से वंचित, और भूखे बच्चों को देखकर वह अपने कैमरे मेें उतार लेते हैं। उनके खींचे चित्रों में देश की यह विषमता खुलकर सामने आई है।

इनसेट -------------------
शहर के आम दृश्य को कैमरे से खास बनाने की कला
बरगढ़ निवासी रेवती शरण भारत के शहरों में आम दिखने वाले दृश्यों को एक खास समय में अपने कैमरे में उतारते हैं। वह कहते हैं कि किसी खास समय और प्राकृतिक रोशनी का इंतजार करने के बाद लिए गए स्नैप बेहद सुंदर दिखाई देते हैं। वह इसके लिए एक ही स्थान पर रह कर सुबह से देर रात तक बिता देते हैं जिससे एक सही समय पर उस दृश्य को कैमरे उतारा जा सके। इनके कैमरे से इलाहाबाद के नैनी पुल से लेकर बनारस व चित्रकूट के कई धार्मिक स्थानों को प्राकृतिक रोशनी का इंतजार कर निकाला गया है।
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इनसेट -------------------
जूते में ही उकेर दी बच्चे की मासूमियत
बाराबंकी के रहने वाले मेघराज सोनी ने एक ऐसी सोच को मूर्ती का रूप दे दिया जिसे देखने वाले उनके कायल हो गए। जी हां माना जाता है कि बाप का जूता बच्चे के पैर में आ जाए तो बच्चा बड़ा हो गया। कुछ इसी सोच को मेघराज ने बड़े ही खूबसूरती से पेश किया है, तिराकोटा कलाकारी के जरीए लकड़ी में नक्काशी कर बनाए गए जूते में एक मासूम बच्चे की कलाकृति को उभार कर दिखाने का प्रयास किया है।

इनसेट -------------------
कबाड़ का उपयोग बखूबी किया
आजमगढ़ निवासी आशुतोष को पशु पक्षियों से बेहद लगाव है। वह सीमेंट, मेटल और कबाड़ हो चुकी चीजों से पक्षियों के विभिन्न रूपों को दिखाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं। मेटल से बने पक्षी उनकी सबसे सराहनीय कलाकृतियां रहीं। उनका मानना है कि कबाड़ को अगर ध्यान से देखा जाए तो कोई न कोई कलाकृति जन्म ले लेती है।
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