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तेहि छन मध्य राम धनु तोरा, भरे भुवन धुनि घोर कठोरा

Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
Chitrakoot
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राजापुर (चित्रकूट)। उदघटा गांव में रामलीला के दूसरे दिन धनुष यज्ञ लीला का आनंद गांव और आसपास के लोगों ने लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मर्यादा पुरुषोत्तम राम की आरती से हुआ।
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लीला मंचन में जनक यज्ञशाला, श्रीराम की झांकी, रावण बाणासुर संवाद, परशुराम लक्ष्मण संवाद आदि प्रसंगों का दर्शकों ने आनंद लिया। जनक दरबार में महर्षि विश्वामित्र के पूछे जाने पर विदेहराज जनक ने स्वयंवर के कारणों को नृपों को बताया तथा अपने प्रण की जानकारी कराई- बोले बंदी बचन बर सुनहु सकल महिपाल/पन बिदेह कर कहहिं हम भुजा उठाई विसाल। जब कोई राजा धनुष तोड़ना तो दूर उसे हिला तक न सका तो जनक विलाप करने लगे। इस पर श्रीराम ने विश्वामित्र के आदेश पर धनुष भंग कर दिया। धनुष यज्ञ की लीला में जनक के रूप में जुगुल किशोर , रावण- उदित नारायन शुक्ला, विदूषक- दिनेश द्विवेदी, श्रृंगारी- श्रीसागर मिश्र, विश्वामित्र- सुभाष पांडे, राम- अखिलेश द्विवेदी, बाणासुर- शिवम द्विवेदी, अहिरावण- चंद्र प्रकाश द्विवेदी, परशुराम- पंकज पांडे, लखनलाल- बबलू शुक्ल, के अलावा व्यास की भूमिका में शिवकिशोर शर्मा ने निभाई। स्थानीय कलाकारों ने भी भूमिकाएं निभाईं।
उद्घटा में हर साल कार्तिक के महीने में पांच दिवसीय रामलीला का मंचन होता है। रामलीला की शुरुआत लगभग चौंतीस साल पहले हुई, जब ग्रामीणों ने अपने गांव में टीम तैयार कर गायत्री रामलीला कमेटी का गठन किया और फिर रामलीला होने लगी। मौजूदा समय में कमेटी के अध्यक्ष कमलेश द्विवेदी, महामंत्री उदित नारायण शुक्ला और शैलेंद्र द्विवेदी कोषाध्यक्ष हैं।
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