- 43.13 करोड़ के मामले में पहली राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट।
- 33 आरोपी अभी भी जेल में, 18 अन्य की अर्जी पर भी होनी है सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। बहुचर्चित 43.13 करोड़ रुपये के कोषागार घोटाले में लगभग ढाई महीने बाद एक बड़ी राहत की खबर आई है। सदर कोतवाली क्षेत्र के ब्यूर गांव निवासी वयोवृद्ध महिला पेंशनर जोगवा उर्फ जगुवा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सशर्त जमानत दे दी है। यह इस मामले में गिरफ्तार 34 आरोपियों में से पहली जमानत है। अभी 18 अन्य की जमानत अर्जी पर हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हुई है।
84 वर्षीय जोगवा देवी पारिवारिक पेंशनर हैं। इनके पति सत्यव्रत त्रिपाठी 1990 में लेखपाल पद से सेवानिवृत्त हुए थे और वर्ष 2000 में उनका निधन हो गया था। इसके बाद से उन्हें पेंशन मिल रही थी। जांच में पाया गया कि उनके खाते में 28 लाख छह हजार पांच सौ छह रुपये आए। ये रकम फरवरी 2024 से मई 2025 के बीच की है। यह राशि सामान्य पेंशन से कहीं अधिक बताई जा रही है। इसी आधार पर 17 अक्टूबर को उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी और 29 अक्टूबर को उन्हें 14 अन्य पेंशनरों के साथ जेल भेज दिया गया था। जिला कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद परिजनों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाईकोर्ट में जोगवा देवी के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि पेंशनर के खाते में आई अतिरिक्त धनराशि के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने बताया कि अमित मिश्रा नामक एक व्यक्ति ने उन्हें बहकाकर कहा था कि गलती से यह राशि खाते में आ गई है और बेटी की शादी के लिए पैसे निकालने की बात कहकर यह राशि ले ली। अधिवक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि जोगवा देवी निरक्षर हैं और उन्होंने किसी भी प्रकार की जालसाजी नहीं की है। उन्होंने कानून का पालन करते हुए खुद पुलिस के पास पहुंचने की बात भी कही, वहीं, विपक्षी अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि खाते में 28 लाख से अधिक की धनराशि सात अलग-अलग तिथियों में निकाली गई है, जिससे यह नहीं कहा जा सकता कि पेंशनर को इसकी जानकारी नहीं थी।
दोनों पक्षों की लंबी बहस और रिकॉर्ड अवलोकन के बाद, अदालत ने जोगवा देवी को सशर्त जमानत दी है। अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि वह निरक्षर और वयोवृद्ध हैं, और सरकारी धन को उनके खाते में स्थानांतरित करने में उनकी कोई भूमिका नहीं पाई गई। उन्हें अंतरिम जमानत दी गई है और उन्हें मुकदमे की कार्रवाई में पूरा सहयोग करना होगा, साथ ही किसी भी साक्ष्य से छेड़छाड़ नहीं करनी होगी।
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अन्य आरोपियों को भी जगी उम्मीद
कोषागार घोटाला मामले में कुल 99 आरोपी नामजद हैं, जिनमें से 34 वर्तमान में जेल में हैं। इसमें एटीओ विकास सचान और अकाउंटेंट अशोक वर्मा जैसे नाम भी शामिल हैं। एक अन्य नामजद एटीओ संदीप श्रीवास्तव की मृत्यु हो चुकी है। 20 नामजद आरोपियों की जिला कोर्ट से जमानत याचिका खारिज हो चुकी है, जबकि 18 अन्य की जमानत पर फिलहाल हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हुई है। रिटायर्ड एटीओ अवधेश प्रताप सिंह को गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट से स्टे मिला हुआ है। जोगवा देवी को मिली इस पहली जमानत से अन्य आरोपियों और उनके परिजनों को उम्मीद जगी है कि उन्हें भी न्याय मिलेगा। जोगवा देवी के पुत्र शैलेंद्र त्रिपाठी और अन्य परिजनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है।
जेल में बिताए कठिन दिन
जोगवा देवी के परिजनों ने बताया कि जेल में उनके कठिन दिन बीते हैं। उनके पैर जेल में गिरने से टूट गए थे, जिसके बाद उनके पैर में रॉड पड़ी थी। शैलेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि उनकी मां जेल में रोते हुए कहती थीं कि अब जमानत न कराओ, मरने दो। परिजनों ने बताया कि वे सोमवार तक कोर्ट के कागजात लेकर उन्हें जेल से ले आएंगे।