पूरे देश की प्रकृति बेहद फायदेमंद
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। कृषि उद्यमी मिलन कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों ने माना कि पूरे देश की प्रकृति बेहद फायदेमंद है। हर स्थान पर कुछ न कुछ कच्चा माल मिलता है और उसे उसी स्थान पर तैयार करने का काम शुरू हो तो आर्थिक समस्या का समाधान हो सकता है। कृषि उपज से ही लघु व कुटीर उद्योग स्थापित कराए जाएं।
दीनदयाल शोध संस्थान के उद्यमिता विद्यापीठ लोहिया सभागार में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के महानिदेशक डा. त्रिलोचन महापात्रा, डीआरआई के संगठन सचिव अभय महाजन व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद जोन जबलपुर के निदेशक डा. अनुपम मिश्रा की मौजूदगी में कार्यक्रम हुआ। जिसमें मप्र व छत्तीसगढ़ राज्य के कृषि विज्ञान केन्द्रों के वैज्ञानिकों व कई जिलों से आये कृषि उद्यमियों की सहभागिता रही। डॉ. महापात्रा ने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक गंगा जमुनी संस्कृति वाले देश देव भूमि भारत पर प्रकृति की असीम अनुकंपा है, प्रकृति ने भारत को स्वयं पूर्ण बनाया है। निदेशक डा. अनुपम मिश्रा ने कहा कि हमारे गांव प्राकृतिक संसाधनों के अथाह भंडार है। ऐसा एक भी गांव नहीं है जहां कोई न कोई कच्चा माल उपलब्ध न हो। संगठन सचिव महाजन ने कहा कि संस्थान विविध प्रकल्पों के माध्यम से ग्राम स्तर पर कृषि उद्यमियों को प्रशिक्षण देकर ग्राम स्तर पर कुटीर उद्योग प्रारंभ करने का अभियान चला रहा है। विभिन्न क्षेत्रों से आए कृषि उद्यमियों ने कहा कि नवीन तकनीकि की जानकारी देने एवं लोगों द्वारा अपने-अपने क्षेत्र में किए जा रहे विविध प्रयासों के आदान-प्रदान के लिए ऐसे प्रयास होने चाहिए। कार्यक्रम में डा. आरएनएस बनाफर निदेशक विस्तार सेवाएं ग्वालियर डा.एएन राठौर निदेशक विस्तार सेवाएं रायपुर, डा. एसएन तोमर, डा. एसआरके सिंह प्रधान वैज्ञानिक अटारी जबलपुर, सहित कुल 160 वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि उद्यमियों ने प्रतिभाग किया।