बीएड टीईटी अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति से मांगी इच्छा मृत्यु की इजाजत
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। उत्तर प्रदेश के बीएड-टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों का मानना है कि अब उनके साथ न्याय नहीं हो पाएगा। हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक अपने हक की लडाई लड़ी और जीते। न्याय पर से भरोसा उठता देख 2011 के बीएड-टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों ने देश के राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी है।
कचहरी परिसर में मंगलवार बैठक कर एसोसिएशन के विनय कुमार गुप्ता, अरविन्द तिवारी, कैलास साहू, जयराम शर्मा व संतोष आदि ने प्रदेश सरकार पर बेरोजगारों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया। मंडल प्रभारी कैलास साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर बनी हाई पावर कमेटी शिक्षा मित्रो के लिए कार्य कर रही है। बीएड टेट बेरोजगारों द्वारा किये जा रहे ट्वीट इसकी बानगी है। मामला हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट के निर्देश पर टेट एकेडेमिक मेरिट के आधार पर इतने ही पदों पर12 दिसंबर 2012 को विज्ञापन जारी कर 4 फरवरी से काउंसिलिंग भी शुरू कर दी।
हाईकोर्ट की डबल बेंच ने काउंसिलिंग पर रोक लगा दी। दो साल फैसला आने में लग गया। टेट मेरिट विज्ञापन बहाल हो गया। अखिलेश सरकार फैसले के विरोध में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। बीते साल 25 जुलाई 2 व 17 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया। 15वां संशोधन बहाल हो गया। कोर्ट ने सरकार को 7 दिसंबर 2012 के विज्ञापन पर लिबर्टी प्रदान की। लेकिन कोर्ट का फैसला आने से पहले अब तक कोर्ट के ही आदेश पर 66 हजार लोग नियुक्ति पा चुके थे। कोर्ट ने इन्हें हटाने से मना कर दिया। अभ्यर्थी विज्ञापन पर ही अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट लिबर्टी आधार पर नौकरी की मांग कर रहे है।