पद्म भूषण विख्यात कवि गोपाल दास नीरज का धर्मनगरी से भी गहरा नाता था। वह जिले के कवि सम्मेलनों में भी भाग लिया करते थे। उन्होंने भारतीय साहित्य संस्थान द्वारा 1986 में आयोजित शहर -नीरज निशा कार्यक्रम में अपनी लिखी कविताओं से जिले वासियों का दिल जीत लिया था। आज भी उनकी पढ़ी गई कविताओं को यहां के कवि गुनगुनाते हैं।
शहर के नए धर्मशाला में भारतीय साहित्य संस्थान ने 1986 में कवि सम्मेलन का आयोजन किया था। जिसका नाम विख्यात नीरज के नाम पर ‘नीरज निशा’ रखा गया था। जिसमें उन्होंने रागिनी है एक प्यार की जिंदगी है जिसका नाम। शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब उसमें फिर मिलायी जाए, थोड़ी सी शराब...। क्या शबाब था कि फूल- फ ूल प्यार कर उठा क्या, देख आइना मचल उठा क्या सुरूप था। यह कार्यक्रम भारतीय साहित्य संस्थान के प्रमुख कवि स्व. देशराज पांडेय व तत्कालीन एडीएम रोहित नंदन के नेतृत्व में किया गया था। जिसमें विशिष्ट अतिथि जज प्रेम शंकर गुप्ता थे। कार्यक्रम का संचालन उमाकांत मालवीय ने किया था। इस कार्यक्रम में स्थानीय कवियों ने भी अपनी कविताएं सुनाईं थीं।
चित्रकूट। पद्मम विभूषण विख्यात कवि के निधन पर भारतीय साहित्य संस्थान ने शहर के डा. भाभा कान्वेंट स्कूल परिसर में शोक सभा की। जिसमें कवि निर्मला श्रीवास्तव, मनीष गर्ग, सुनील नवोदित, संदीप श्रीवास्तव, मनोज द्विवेदी, धुव्रा प्रिय दर्शन व समाज सेवी भालेंदु, योगेश जैन, प्रियंक प्रियदर्शन व हबीब खान आदि मौजूद रहे।