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काम किया 28 दिन, मजदूरी मिली मात्र एक हजार

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मनरेगा योजना के तहत हुए कार्यों का जायजा लेने शुक्रवार को केंद्र सरकार की टीम नौगढ़ पहुंची। केंद्रीय टीम ने विकास खंड के तीन गांवों का जायजा लिया और चौपाल लगाकर मनरेगा मजदूरों की समस्याओं को सुना। गांव की महिलाओं ने मनरेगा योजना में घपलेबाजी का आरोप लगाते हुए बताया कि 28 दिन काम करने के बाद भी उन्हें सिर्फ एक हजार रुपये ही मजदूरी मिली है।
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प्राथमिक विद्यालय अमृतपुर में लगी चौपाल के दौरान आई मनरेगा योजना टीम की प्रतिनिधि मीनाक्षी को गांव की महिलाओं ने बताया कि उन लोगों ने 28 दिन का काम किया था और मजदूरी मात्र एक हजार रुपये ही मिली है। रोजगार सेवक तारकेश्वर ने बताया कि पूर्व प्रधान अपना मेठ रखकर काम कराते थे। इससे पहले टीम परसिया गांव पहुंची। यहां जॉब कार्ड पर हाजिरी भरने के अलावा वृद्धा, विधवा और विकलांग पेंशन की जानकारी ली। इसके बाद टीम के सदस्यों ने सोनवार गांव के प्राथमिक विद्यालय में चौपाल लगाकर ग्रामीणों और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से जानकारी ली। अमृतपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय में पहुंची टीम से महिलाओं ने कहा कि उन लोगों का जॉब कार्ड कभी भरा ही नहीं गया है। 28 दिन काम करने के बाद भी खाते में केवल एक हजार रुपये ही आया है। मामले की गंभीरता को देख खंड विकास अधिकारी सुदामा यादव ने जांच कराकर भुगतान कराने को कहा। पंचायत सचिव गुड्डू प्रसाद ने बताया कि गांवों में 998 जॉब कार्ड धारक हैं लेकिन एक्टिव केवल 204 हैं। इस पर टीम ने पूछा कि क्या यहां लोग काम करना नहीं चाहते है या फिर लोगों को काम नहीं दिया जा रहा है। चौपाल में आए प्रवासी मजदूर उमेश कुमार और विपिन कुमार ने अधिकारियों को बताया कि लॉकडाउन में उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ी। अब गांव में ही रोजगार मिल रहा है इसलिए बाहर नहीं जाना चाहते हैं। गांव के राम बच्चन ने लोहिया आवास और शौचालय निर्माण कार्य अधूरा होने की जानकारी दी। इस मौके पर एडीओ आईएसबी गुरुशरण श्रीवास्तव, एडीओ पंचायत प्रेमचंद्र, पंचायत सचिव उपेंद्र साहनी, महेंद्र प्रसाद, गुड्डू प्रसाद सहित गांव के प्रधान, पंचायत सदस्य व स्वयं सहायता समूह की महिलाएं मौजूद रहे।
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